nyuntam aay yojana, nyay scheme
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जयपुर।
राहुल गांधी द्वारा घोषित 20 करोड़ लोगों को राहत देने वाली ‘न्याय’ योजना देश के 115 करोड़ लोगों के लिए भारी पड़ सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों लोकसभा चुनाव के लिए दौरों पर हैं। राहुल गांधी ने चार दिन पहले ही न्यूनतम आय योजना की घोषणा की थी।

राहुल की घोषणा के बाद देश के अर्थशास्त्रियों के भी अलग अलग मत उभरकर सामने आए हैं। आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने कहा है कि सरकार इस योजना के लिए सालाना जरुरी 3.60 लाख करोड़ रुपए का इंतजाम कर सकती है।

इसके दूसरे ​ही दिन खबर आई की रघुराम राजन भारत लौटना चाहते हैं। इसके कुछ ही समय बाद एक और खबर आई कि कांग्रेस की सरकार बनती है तो रघुराम राजन को वित्तमंत्री बनाया जा सकता है।

इन सब बातों में भले ही कोई संबंध नहीं हो, लेकिन सियासी लोगों का दावा कि राहुल गांधी की न्यूनतम आय योजना का खाका और सिगुफा रघुराम राजन के द्वारा ही छोड़ा गया है।

आपको बता दें कि यूपीए की सरकार रहते हुए देश में कम आय वाले ग्रामीण लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना शुरू की गई थी। जिसके तहत पहले साल 24 हजार करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।

यह बात और है कि योजना के करीब 6 साल बाद इसके भ्रष्टाचार को अर्श पर पहुंचा चुके थे। केंद्र में सरकार बदली और नरेंद्र मोदी सरकार ने योजना को नया मोड दिया। 2014 तक योजना में जहां केवल खड्डे खोदने और उनको वापस भरने काम किया जा रहा था, वह विकास के मार्ग पर चल पड़ा।

आज की तारीख में इस योजना के तहत सरकार सालाना 60 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। मोदी सरकार ने 6 करोड़ से ज्यादा गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन फ्री दिए हैं, लेकिन यह पैसा केवल एक ही बार का खर्च है। शौचालय बनावाए, लेकिन उसमें भी पैसे एक ही बार खर्च हुए, जबकि नरेगा हर साल चलती है।

इसी तरह से न्याय योजना की बात की जाए तो इसके तहत करीब 5 करोड़ परिवारों को हर साल 72 हजार करोड़ रुपए उनके खातों में दिया जाएगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर सालाना 3.60 लाख करोड़ रुपए का भार आएगा। देश का वार्षिक बजट ही 24 लाख करोड़ रुपए है।

योजना देश के केवल 5 करोड़ परिवारों, यानी महज 20 करोड़ लोगों को फायदा देगी, जबकि इसका भार पूरे 115 करोड़ लोगों की सेहत पर पड़ने वाला है। देश के टैक्स देने वाले लोगों का पैसा देश के विकास के बजाए, इस तरह की फ्री मामल बांटने वाली योजनाओं में खर्च किया जाना कितना उचित है।

मोदी सरकार ने पिछले साल शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के करीब 12 करोड़ किसान परिवारों, यानी करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा देने वाली है, जबकि उससे देश पर केवल 75 हजार करोड़ रुपए सालाना भार बढ़ेगा।

इस तरह से देखा जाए तो जहां एक तरफ मोदी सरकार किसानों को सालाना 6000 रुपए उनके खाद, बीज व अन्य जरुरतों के लिए दे रही है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी की योजना लागू होती है तो बिना धेले का काम किए 5 करोड़ परिवारों को हर महीने 6000 रुपए, मतलब सालाना 72000 रुपए मिल जाएंगे।

सहज ही समझा जा सकता है कि देश को राजनीतिक दल किस दिशा में धकेल रहे हैं। एक तरफ पहले ही आरक्षण की विसंगतियों के चलते देश काफी बंट चुका है, उपर से इस तरह की मुफ्त योजनाएं समाज की खाई को और गहरा करने का काम करेगी, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है।

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