himetoma Alzheimer
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जयपुर।
डॉक्टर को धरती के भगवान का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है। किसी भी व्यक्ति को जन्म देना जहां भगवान के हाथ होता है, तो जान लेने का फैसला भी ईश्चर ही करता है, किंतु कई बार मरीज भगवान के द्वारा तय की गई मौत को भी मात देने में सफल हो जाता है। भगवान द्वारा मृत्यु तय किये जाने के बाद यदि मरीज के द्वारा मौत को मात दी जाती है तो उसका एकमात्र कारण यही डॉक्टर होता है, जिसको लोग धरती का भगवान कहते हैं।

ऐसी ही एक मरीज है विजयदेवी, जो मौत के मुंह से वापस लौटी है। करीब मृतप्राय हो चुकी विजयदेवी के जीवन में भगवान बनकर आये डॉक्टर राजवेंद्र सिंह चौधरी। विजयदेवी के परिजन तीन माह पहले तक उसको करीब करीब मरी हुई मान चुके थे। फिर भी डॉक्टर के कहने पर एक फीसदी उम्मीद के सहारे उन्होंने मरीज को डॉक्टर के विश्वास पर छोड़ दिया, नतीजा यह हुआ कि जो विजयदेवी तीन माह पहले तक जिंदा लाश बन चुकी थी, वह अब भरपूर जिंदगी जियेंगी।

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मामला राजधानी के जयपुर ब्रेन एण्ड स्पाइन अस्पताल का है, जहां पर मरीज विजयदेवी को भरतपुर, मथुरा और जयपुर के ही एसएमएस अस्पताल में उपचार करवाने के बाद भर्ती करवाया गया था। परिजन बताते हैं कि जयपुर ब्रेन एण्ड स्पाइन अस्पताल में लाने से पहले मरीज को मथुरा के मशहूर नेती अस्पताल में दिखाया था, जहां पर उसके किसी भी सूरत में जिंदा नहीं रहने का दावा किया गया था।

इसके बाद परिजनों ने उसको एसएमएस अस्पताल में एडमिट करवाया, लेकिन दो दिन तक बिलकुल भी सुनवाई नहीं होने के कारण वहां से डिस्चार्ज करा लिया। फिर परिजनों ने मरीज को जयपुर ब्रेन एण्ड स्पाइन अस्पताल में डॉ. राजवेंद्र सिंह चौधरी को दिखाया, जहां पर जरुरी जांचों के बाद डॉ. चौधरी के द्वारा सफल सर्जरी की गई। डॉक्टर चौधरी बताते हैं कि इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज को करीब एक पखवाड़े तक आईसीयू में रखा गया। लगभग दो माह तक आईसीयू में रहने के बाद अब विजयदेवी स्वस्थ है और अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है।

डॉ. चौधरी के मुता​बिक ब्रेन हैमरेज होने की स्थिति बनने से पहले ऐसे मरीजों को हिमेटोमा बनता है, यह रक्तस्राव के कारण बनने वाला एक तरह का थक्का होता है। समय पर अगर इसका इलाज किया जाये तो दवा से मरीज को ठीक किया जा सकता है, लेकिन हिमेटोमा अधिक बड़ा होने के बाद वह ब्रेन पर प्रेशर बनाता है, जो मौत का कारण बन जाता है। ऐसी स्थिति में केवल सर्जरी ही एकमात्र उपाय होता है। सर्जरी नहीं करवाने में अधिक दिन गुजरने पर मरीज की जान को खतरा होता है।

ऐसी स्थिति तब आती है, जब सर्जरी नहीं होती है और हिमेटोमा द्वारा ब्रेन पर दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे केसों में सर्जरी में पारंगत विशेषज्ञ डॉक्टर ही इलाज कर सकता है।