hanuman beniwal jivan parichay
hanuman beniwal jivan parichay

जयपुर।
छात्रों के लिए लड़ते हुए जेल पहुंए गए। तब राजस्थान में भैरूंसिंह शेखावत की सरकार थी, हालत यह हो गई कि रात 2 बजे जेल के दरवाजे खोलने पड़े। राजस्थान के इतिहास में यह एकमात्र मौका था, जब जेल से रात 2 बजे किसी आरोपी को रिहा करना पड़ा। लेकिन यह लड़ाका रुका नहीं, और चढ़ गया कुलपति की टेबल के उपर। छात्र हितों के लिए खूब लड़ा यह लड़काा। इस लड़ाके का नाम है हनुमान बेनीवाल।

आइए आपको बताते हैं दंबगता का पर्याय बन चुके हनुमान बेनीवाल कौन है? जिनको लेकर विश्व की सबसे बड़ी पार्टी इतनी झुकी कि 25 में से एक सीट छोड़नी पड़ी है? हनुमान बेनीवाल नाागैर जिले की खींवसर विधानसभा से विधायक हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

वो 2009 तक भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हुआ करते थे, लेकिन कुछ कारणों से इन्होने पार्टी को छोड़ दिया और अपनी अलग पार्टी बनाई। बताया जाता है कि इन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था।

किसी कारण से उनको साल 2009 में भाजपा से निकाल दिया गया था, इन्होंने 2018 के नवंबर माह में ही रालोपा के नाम से अपनी एक अलग पार्टी बनाई। अब बेनीवाल किसानों और दलितों के लीडर बनने का दावा करते हैं, साथ ही जवानों और किसानों के साथ खुद को खड़ा दिखाते हैं।

इन्हें राजस्थान में काफी प्यार और सम्मान मिला है, खासकर बीते पांच साल के दौरान की इनकी पहचान बहुत बड़े पैमाने पर पहुंच गई है। हाल ही में भाजपा के साथ गठबंधन कर हनुमान बेनीवाल ने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास करवाया है।

बेनीवाल की सियासी शक्ति का परिचय बीते दिनों नागौर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा यह कहने से ही हो जाता है कि उन्होंने ‘हनुमान बेनीवाल को ज्योति मिर्धा के साथ दुश्मनी भुलाकर मंत्री पद के लिए कांग्रेस के साथ आ जाना चाहिए, लेकिन तीन बार प्रयास करने के बाद भी वो नहीं आए।’

गहलोत ज्योति की सभा में दावा किया कि ‘हनुमान बेनीवाल बहुत जिद्दी हैं।’ इसके साथ ही गहलोत ने चेतावनी देते हुए यह भी कह दिया कि वो जीवनभर पछताएंगे।

बेनीवाल ने बीते चार साल में राजस्थान के नागौर, सीकर, बाड़मेर, जोधपुर जयपुर में कई रैलियां निकाली, जिनको किसान हुंकार रैली दिया। इन्हें राजस्थान में भारी समर्थन मिला है। इनकी रैली में लाखों की संख्या में लोग भागीदार बने, जो विरोधियों के लिए एक सबब बन गया।

बेनीवाल ने ऐसी कई रैली निकाली, जो राजस्थान सियासी हलके को हिलाने के लिए काफी थी। हनुमान बेनीवाल की रैलियों ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा दिया।

हनुमान बेनीवाल के जीवन परिचय की बात की जाए तो इनके पिता का नाम स्व. रामदेव बेनीवाल हैं। वो भी दो बार विधायक रह चुके हैं। इनकी माताजी का नाम मोहनी देवी है।

2 मार्च 1972 को जन्मे बेनीवाल शुरू से ही जिद्दी किस्म के रहे हैं। एजुकेशन की बात करें तो इन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी और को-ओपरेटिव में डिप्लोमा कर रखा है।

बेनीवाल की पत्नी का नाम कनिका बेनिवाल, जो कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्याय से बीएससी पास हैं। बेनीवाल के दो संतान हैं, बेटी का नाम दीया बेनीवाल है और बेटे का नाम आशुतोष बेनीवाल है।

हनुमान बेनीवाल का ननिहाल पिण्डेल गौत्री जाटों में हैं, जो सीलगांव, मुंडवा तहसील में हैं। इनके ससुर का नाम कृष्ण गोदारा है।

राजनीतिक जीवन की बात करें तो 1994 और 1995 में लगातार दो बार राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष बनने वाले हनुमान बेनीवाल ने छात्र राजनीति में खूब संर्घष किया है।

इसके अगले ही साल बेनीवाल 1996 में राजस्थान विधि कॉलेज के अध्यक्ष बने। बेनीवाल यहीं पर रुके नहीं, बल्कि अपने संघर्ष के बलबूते एक साल बाद ही 1997 में राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बन गए।

छात्र राजनीति की सबसे बड़ी सीढ़ी नापने के बाद बेनीवाल साल 2003 में मुंडवा, जो कि उनके पिता रामदेव बेनीवाल की सीट थी, पर से विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे चुनाव लड़ा, लेकिन वह 2000 वोटों से हार गए।

इसके बाद बेनीवाल साल 2008 मे भाजपा के टिकट पर नवगठित नागौर की खींवसर विधानसभा से चुनाव लड़ा और नागौर जिले की सभी विधानसभा सीटों में सबसे बड़ी जीत हासिल की।

साल 2009 में वसुंधरा राजे के साथ सियासी लड़ाई के कारण वह बाहर कर दिए गए। और 2013 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे खींवसर विधानसभा सीट से एक बार फिर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के दुर्गसिंह चौहान को 24600 वोटों से हराकर दूसरी बार विधायक बने।

इसके बाद लगातार सरकार और विपक्ष से लड़ाइयां लड़ीं। नवंबर 2018 में बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकत़ांत्रिक पार्टी का गठन कर 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 3 विधायक जिताने में कामयाब हुए।

कांग्रेेस को समर्थन देने का वादा किया, लेकिन मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बनने की स्थिति में ही। ऐसा नहीं हुआ और बेनीवाल ने फिर से बिगुल बजा दिया।

राजस्थान ही नहीं, अपितु पूरे देश में किसान कौम के सच्चे साथी एवं हक के लिये लडने वाले, अन्याय के खिलाफ अपनी दंबग आवाज और निडरता से झंडा गाडने वाले के तौर पर हनुमान बेनीवाल की पहचान बन चुकी है। इसी विशेषता के कारण आज राजस्थान प्रदेश के युवाओं की पहली पंसद बन चुके हैं।

बेनीवाल की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढती जा रही है। भाजपा के साथ गठबंधन कर खुद नागौर से उम्मीदवार बने हैं, जो कि कांग्रेस की ज्योति मिर्धा के दादा नाथुराम मिर्धा की परंपरागत सीट मानी जाती है।

नागौर पंचायत तंत्र की जनक स्थली भी है। इसको राजस्थान की राजनीति की प्रयोगशाला भी कहा जाता है। देखना होगा कि यह प्रयोगशाला हनुमान बेनीवाल के लिए कैसी साबित होगी?

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