जयपुर।
सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के उपाधीक्षक डॉ. एसएस राणावत और डॉ. प्रभात सराफ अस्पताल की लाइफ लाइन के नाम से दवाइयां खरीदकर बाजार में बेच देते थे।

उनके इस घिनोने काम में साथ देने के लिए करीब आधा दर्जन फार्मासिस्ट और कई नर्सिंग स्टाफ भी शामिल थे।

दवाइयां कंपनियों से खरीदकर उनको बाजार में मेडिकल स्टोर पर बेचा जाता था, जिसमें करीब 5 करोड़ रुपए का घपला था।

इसी घपले को दबाने के लिए लाइफ लाइन में आग लगवाई गई थी, ताकि जांच होने पर प्रकरण उजागर नहीं हो।

आज मंत्री रघु शर्मा के निर्देश पर एनएचएम के निदेशक डॉ. समित शर्मा ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि दोषियों में डॉ. एसएस राणावत, सह प्रभारी डॉ. प्रभात सराफ, पांच अन्य फार्मासिस्ट और कई नर्सिंगकर्मी शामिल हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि इसकी रिपोर्ट के साथ सजा की अनुषंशा के साथ केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

बताया जा रहा है कि जब से डॉ. राणावत और डॉ. सराफ को दवा खरीद का प्रभार दिया गया था, तभी से वह दोनों इस घिनोने खेल में लिप्त थे।

इसके तहत दवा कंपनी से खरीद आदेश एसएमएस अस्पताल के नाम से होता था, जबकि डिलीवर सीधे किसी अन्य मेडिकल स्टोर या निजी अस्पताल में हो जाती थी।

इस कृत्य में अभी कई अन्य नाम सामने आने की संभावना है। किंतु इस बीच डॉ. राणावत का नाम सामने आने से साफ हो गया है कि यह प्रकरण बहुत बड़ा हो सकता है।