Lok sabha electoin 2019 (9)
Lok sabha electoin 2019 (9)

जयपुर।
प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने के करीब 6 माह के भीतर देश में ऐसी लहर चली कि कांग्रेस, सपा, बसपा, कॉमरेडों समेत किसी भी पार्टी को खुद पर से भरोस ही उठ गया। राजस्थान समेत कई राज्य ऐसे थे, जहां पर जितनी लोकसभा की सीटें थीं, वो सब की सब भाजपा के खाते में चली गईं।

इस तरह की अकल्पनीय जीत के बाद एक कहावत बनी कि भाजपा ने ‘ऐरे गैरे नत्थू खैरे’ को भी टिकट दिया तो वह मोदी लहर में जीतकर संसद पहुंच गया। बात भी सही है, जिनका न कोई जनाधार, जिन्होंने पूरा संसदीय क्षेत्र असल तो दूर कागजों में भी नहीं देखा, उसको प्रचंड़ जीत हासिल हुई।

जो वर्तमान पीढ़ी, यानी जिनकी उम्र करीब 40 साल से कम है, उनमें से अधिकांश यह मान बैठे कि इस तरह की जीत किसी पार्टी को पहली बार हुई है, लेकिन यह सही नहीं है। भाजपा को पहली बार राज्य में आधी से ज्यादा, यानी 25 में से 13 सीटों पर जीत 1989 में मिली थी।

राजस्थान की बात करें तो यहां पर भाजपा ने सभी 25 में से 25 सीटों पर जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले साल 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी भाजपा को 25 में से 21 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, लेकिन बीजेपी तब भी कांग्रेस के किले ढ़हाने में कामयाब नहीं हुई थी।

ऐसा नहीं है​ कि संसदीय इतिहास में भाजपा ने ही 25 में से सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, बल्कि ऐसा ही एक समय कांग्रेस के लिए भी आ चुका है, जब सभी सीटों पर कांग्रेस विजयी हुई थी।

यह समय था आठवीं लोकसभा का चुनाव, यानी 1984 का वह वक्त, जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ गया था। देश में ऐसी लहर थी कि कांग्रेस को एक तरफा बहुमत मिला था।

उससे पहले भी कांग्रेस को 1957 में 22 में से 19 सीट, 22 में से 14, 1971 में 23 में से 14, 1980 में 25 में 18 सीटों पर जीत मिल चुकी थी। 1984 के बाद भी कांग्रेस ने 1998 में 25 में से 19 सीट पर जीत मिली थी।

अंतिम बार कांग्रेस ने 2009 में 25 में से 20 सीट पर जीत हसिल की थी। जयपुर, जिसको भगवागढ़ कहा जाता था, वह भी बरसों बाद तब भाजपा के हाथ से ​फिसल गया था, जब भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी कांग्रेस के महेश जोशी से हार गए थे।

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