हिंदू का मूल चिंतन सबको साथ लेकर चलने का है- डॉ. भागवत

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—सज्जन सक्रिय शक्ति समाज में मिलकर कार्य करे

जयपुर।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत अपने दस दिवसीय राजस्थान क्षेत्र के नियमित प्रवास में जयपुर में विभिन्न सत्रों में क्षेत्र के गणमान्य, प्रभावी व सामाजिक स्तर पर सक्रिय होकर देश हित के रचनात्मक भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों से सेवा सदन में मिले।

इनमें सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी, विधिवेता व पद्मश्री से अलंकृत प्रमुख थे। सम्पूर्ण भारत में सरसंघचालक के विभिन्न प्रवासों में समाज जीवन में सक्रिय योगदान देने वाले जिनकी बात समाज मानता है, ऐसी सज्जन शक्ति से भेंट वार्ता का क्रम रहता है।

संघ का संपर्क कार्य विभाग विभिन्न स्तर पर ऐसे व्यक्तियों से समय समय पर मिलता है, मिलवाने की योजना करता है। ऐसे समाज नेतृत्व की संघ के विचार, कार्य को समझने की जिज्ञासा व जुड़ने की इच्छा भी रहती है। संघ से संवाद, चर्चा का भी सभी का मन रहता है।

सरसंघचालक डॉ मोहनराव भागवत ने ऐसे लोगों से समसामयिक विषयों पर चर्चा की चर्चा में संघ के चिंतन व कार्य को उनके समक्ष रखा व उनके विचार एंव सुझाव सुने।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना के समय ही स्पष्ट किया था कि हमको सम्पूर्ण समाज का संगठन करना है।

संघ का मानना है कि अपने इस राष्ट्र को अपने निज गौरव पर खड़ा करने के लिए, परम वैभव संपन्न बनाने के लिये सम्पूर्ण समाज को जुड़कर प्रयास करने होंगे।

संघ का आह्वान है कि इस पवित्र मातृभूमि का भाग्य बदलने लायक हम सभी को बनना है व सम्पूर्ण समाज को बनाना है।

आप सभी इस दिशा में लगे हैं, यह अत्यंत प्रेरणादायक है। सम्पूर्ण समाज की सज्जन शक्ति सक्रिय होकर एक दिशा में राष्ट्रीय अस्मिता के साथ देश हित में रचनात्मक कार्य करे, यही भारत का व संघ का चिंतन है।

संघ के स्वयं सेवक के नाते, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नाते सबको जोड़ने का हमारा प्रयास रहता है और सबको आग्रह रहता है संघ को समझने के लिए संघ में आइये।

भागवत ने कहा कि आप संघ को अन्दर से देखिए। संघ के स्वयं सेवक समाज में अनेक काम करते है, उनसे जुड़िये, उनके साथ मिलकर काम करना चाहते है, कीजिए।

आप जुड़े बिना ही अपना काम करना चाहते है, अवश्य करिए। आपको कोई हम सहायता कर सकते है, हमको भी आपसे कोई सहायता चाहिए तो हमारा आपस का परिचय-संवाद समाजहित में रहेगा।

अलग-अलग समूह में डॉक्टर भागवत ने कहा कि भारत की अन्तर्निहित शक्ति है जो जगत का कल्याण कर सकती है हम सभी भारतवासियों को मिलकर इसे बढ़ाने का कार्य करना है।

उन्होने कहा तात्कालिक समस्याओं का भी समाधान संस्कृति व संस्कार के आधार पर जीवन मूल्यों की स्थापना से ही निकलेगा हिंदू का मूल चिंतन सबको साथ लेकर चलने का स्वभाव है।

आने वाले सभी संपर्क बंधुओं को राष्ट्रीय विचारों का साहित्य दिया गया। उल्लेखनीय है कि संपर्क विभाग द्वारा आगामी 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन हम और हमारा संविधान नामक पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम महर्षि नारद सभागार में है।

इस कार्यक्रम में इस पुस्तक के लेखक रमेश पतंगे रहेंगे जिन्होंने डॉक्टर अंबेडकर के जीवन पर गहन अध्ययन किया है। मैं मनु और संघ इस विषय पर भी पुस्तक लिखी है।

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