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जयपुर।
राजस्थान में स्वाइन फ्लू विकराल रुप धारण कर चुका है। प्रदेश में अधिकारिक तौर पर अब तक 51 मौत हो चुकी है।

चिकित्सा विभाग के अुनसार इस साल 21 दिन के भीतर 1335 लोगों को पॉजिटिव पाए गए हैं।

चिकित्सको के अनुसार सोमवार दिन में रात को हुई बरसात की आद्रता के चलते इस मौसमी बीमारी के और बढ़ने की संभावना तेज हो गई है।

डॉक्टरों का मानना है कि आद्रता बढ़ने के कारण वायरस तेजी से फैलता है, जिसका कारण इस वायरस के लिए नमी की संवाहक क्षमता मुफीद मानी जाती है।

खुद डॉ. असवाल इस बात को मानते हैं। उनका कहना है कि सर्दी, सर्द हवाएं और वातावरण में आद्रता परेशानी पैदा करती है।

जिसको ध्यान में रखते हुए चिकित्सा विभाग के अनुसार स्क्रिनिंग का दायरा बढ़ा दिया गया है।

जहां पर अब तक मरीज सामने आए हैं, वहां के तीन-तीन घरों की स्क्रिनिंग की जा रही थी, उसको बढ़ाकर 50 घरों तक कर दिया गया है।

जिन परिवारों में मरीजों की मौत हुई है, वहां पर लगातार एक माह तक निगरानी रखी जा रही है।

सीएमएचओ द्वितीय डॉ. प्रवीण असवाल का कहना है कि आईइसी की जा रही है, अकेले जयपुर द्वितीय में ही 20 यूपीएससी टीमें काम कर रही हैं, जो घर-घर जाकर एच1 एच1 वायरस से प्रभावित मरीजों की जांच और लोगों को जागरुक करने का काम कर रही है।

खास बात यह है कि जो मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं, उनको डॉक्टर की टीम निगरानी कर समय पर दवा देने का काम किया जा रहा है।

मृतकों और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा केवल सरकारी अस्पतालों और उन निजी अस्पतालों का है, जो खुद आगे बढ़कर आंकड़े बता रहे हैं।

चिकित्सा विभाग के सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा 60 से उपर पहुंच चुका है, लेकिन निजी अस्पतालों द्वारा सूचना छिपाने के कारण केवल 51 ही बताए जा रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्राइवेट हॉस्पिटल खुद की बदनामी छिपाने के लिए आंकड़े दिखाने में मनमर्जी कर रहे हैं?