जयपुर।

पुलिस अधीक्षक मंथली प्रकरण के आरोप में निलंबित रहे आरपीएस लोकेश सोनवाल आज सचिवालय परिसर में स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रदेश के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे।

आईपीएस लोकेश सोनवाल ने सचिवालय में सीएमओ के भीतर आईएएस, आईपीएस और आरएएस एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल के साथ सीएम गहलोत से मुलाकात की।

इस बात की पुष्टि खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा शाम को 4:20 बजे किए गए ट्वीट से हुई है। बताया जा रहा है कि मंथली कांड में आरोपी सोनवाल का पासपोर्ट भी अदालत में जमा किया गया था। एसीबी के सामने मई 2015 में सरेंडर करने वाले आईपीएस सोनवाल को तब अदालत ने जमानत मुचलके मंजूर करते हुए सशर्त रिहाई के आदेश दिए थे।

उक्त मौके पर अदालत ने कहा कि जब तक मुकदमा चलेगा, तब तक आरोपी सोनवाल देश छोड़कर नहीं जा सकते। साथ ही कोर्ट ने यह भी हिदायत दी थी कि वह स्वयं या उनके परिचित किसी प्रकार से गवाहों को डराने धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे।

कोर्ट ने कहा था कि तारीख की पेशियों पर उनको नियमित उपस्थित रहना होगा। तब सुनवाई करते हुए अदालत ने 50-50 हजार रूपए के 2 जमानतें और एक लाख रूपए का मुचलका देने को कहा था।

इसके बाद उसी दिन सोनवाल को जमानत पर जयपुर जेल से रिहा कर दिया गया था। गौरतलब है कि निलंबित आईपीएस राजेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद आईपीएस लोकेश सोनवाल भूमिगत हो गये थे। बाद में 29 जून 2015 को राजेश मीणा और अगले ही दिन सोनवाल को भी बहाल कर दिया गया था।

राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर उन्होंने 29 मई 2014 को अदालत में समर्पण किया था। इसके बाद लगभग 10 माह सोनवाल जयपुर जेल में रहे। रिहाई के लिए मई 2015 में उच्चतम न्यायालय में आवेदन किया गया था।

इसपर उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश पी. सथाशिवम व रंजन गोगोई की बैंच ने लोकेश सोनवाल की जमानत याचिका मंजूर करते हुए अधीनस्थ न्यायालय की संतुष्टि पर जरूरी राशि के जमानत मुचलके पेश करने पर जेल से रिहाई के आदेश दिए थे।

इसी प्रकरण में निलंबित रहे आईपीएस राजेश मीणा को भी उससे कुछ दिन पूर्व उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी। मामले में दलाल रामदेव कसेरा अभी भी जेल में ही है।

इस मामले में एन्टी क्रप्शन ब्यूरो ने अजमेर जिले के 11 थानाधिकारियों को नामजद किया था। इनमें से एक को जमानत मिल गई थी, जबकि एक को फरार घोषित किया गया था।

इसी प्रकरण में आरोपी एक थानाधिकारी को अभियोजन स्वीकृति की कार्यवाही लंबित रहते राज्य सरकार पदोन्नत कर चुकी थी। बाकी 8 की गिरफ्तारी के लिए एसीबी प्रयासरत रही, लेकिन सभी गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत हो गए।

आईपीएस सोनवाल ने हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव से पहले टिकट वितरण के दौरान अपनी पत्नी कांता सोनवाल के लिए बगरू विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी का टिकट मांगा था, लेकिन उनको नहीं मिला।