नई दिल्ली।

शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने आज भारत सरकार (Govt) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को करारा झटका दिया है।

कोर्ट ने 200 प्वाइंट रोस्टर की जगह 13 पॉइंट रोस्टर को वापस लागू करने के लिए दायर की गईं याचिकाओं (Gvot-UGC) को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि 23 जनवरी को दिए गए फैसले में कोई कमी नहीं है, इसलिए फैसला नहीं बदला जाएगा। गौरतलब है कि अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थाओं में 200 प्वाइंट रोस्टर को रद्द करते हुए 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया था।

इसके कारण सभी विश्वविद्यालयों (University) और महाविद्यालयों (College) में होने वाली शिक्षकों को भर्तियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थियों को मिलने वाला आरक्षण एक तरह से खत्म हो गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (MHRD) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसपर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने 23 जनवरी को यह फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार और यूजीसी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों के द्वारा ऐसे कोई नए तथ्य पेश नहीं किए गए हैं, जिसके आधार पर अदालत अपना 23 जनवरी का फैसला बदलने पर मजबूर हो सके।

उल्लेखनीय है कि इन याचिकाओं के चलते यूजीसी से फंडेड विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में करीब 6000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब इसके जल्दी चालू होने की संभावना है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भी एससी, एसटी और ओबीसी के अभ्यर्थियों को यह उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मामले पर अध्यादेश लेकर आएगी।

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