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-फ्रस्ट ग्रेड एग्जाम की तारीख बढ़ाने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री का किया जाएगा घेराव

जयपुर।

राजस्थान में सरकार बदल गई है, लेकिन बेरोजागारों की हालात जस की तस है। इसको लेकर कल राज्य के बरोजागार बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।

सबसे बड़ा आंदोलन जयपुर में सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरकारी आवास पर प्रदर्शन की योजना है।

राजस्थान विवि के शोध छात्र प्रतिनिधि रामसिंह सामोता ने बताया कि एक सप्ताह पहले खुद मुख्यमंत्री से मिलकर विद्यालय व्याख्याता परीक्षा की तारीख आगे खिसकाने के लिए ज्ञापन दिया था, लेकिन उसको लेकर सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

सामोता ने बताया कि प्रदेशभर में कल एक साथ 10.30 हजारों अभ्यर्थी जिला मुख्यालयों और जिलों में स्थित विश्वविद्यालयों के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया जाएगा।

गौरतलब है कि नवंबर में ही द्वितीय श्रेणी परीक्षा आयोजित की गई थी। अब 13 जनवरी को स्कूल लेक्चरर एग्जाम प्रस्तावित है।

बेरोजाारों का कहना है कि परीक्षा की तारीख नजदीक होने के कारण अभ्यर्थियों को समय नहीं मिल पाया है। उन्होंने परीक्षा अप्रेल या लोकसभा चुनाव के बाद आयोजित करवाने की मांग की है।
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भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना जाने लगी ठंड़े बस्ते में
-नि:शुल्क दवा योजना पर जोर, पुरानी योजना में आने लगी रुकावटें

जयपुर। प्रदेश में सरकार बदलने के साथ ही योजनाओं की प्राथमिकता भी बदलती हुई नजर आ रही है। एक दिन पहले ही शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह द्वारा योजनाओं की प्राथमिकता बदलने की घोषणा ने सियासत में भूचाल ला दिया है। इस बीच पिछली सरकार द्वारा 2400 करोड़ रुपए भुगतान कर लाखों मरीजों को लाभ देने का दावा करने वाले भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में भी रुकावटें शुरू हो चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार कई निजी अस्पतालों को उपचार बिलों के पेटे मिलने वाला साप्ताहिक भुगतान रोक दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि इन अस्पतालों पर उपचार के पेटे अधिक बिल उठाने के पहले ही आरोप लग चुके हैं, तब बीमा कंपनी ने ही भुगतार रोका था। लेकिन इस बार राज्य सरकार के द्वारा भुगतान रोकने के कारण इन अस्पतालों ने इस योजना के तहत होने वाले इलाज पर रोक लगा दी है। हालांकि, इस तरह के हालात पहले भी उपज चुके हैं, लेकिन तब अस्पतालों द्वारा गलत बिल उठाने के कारण बीमा कंपनी ने हाथ खड़े किए थे। इस बार सीधे ही सरकार द्वारा बीमा कंपनी को भुगतान नहीं करने का मामला सामने आया है। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस योजना में और अधिक पैसा नहीं देने जा रही है।