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सपना सुहासा@जयपुर/दौसा।

क्या कोई यकीन कर सकता है कि 18-20 साल के कई लड़के हाथों में लट्ठ लेकर नेशनल हाईवे पर खटिया बिछा कर बैठे हों, और उनको पुलिस प्रशासन कुछ भी नहीं कहें, बल्कि 5 जिलों के लोग और कई राज्यों के यात्री उनसे खौफजदा हों?

जी हां, यह बिलकुल सच है! यह तस्वीर है राजस्थान के दौसा जिले में सिकंदरा की। जहां पर गुर्जर आरक्षण आंदोलन में शामिल सेकंडों की संख्या में ऐसे लड़के सड़क पर बैठे और खाट डालकर लेटे देखे जा सकते हैं, जो तकरीबन 18, 20, 22, 25 और अधिकतम 30 साल की कैरियर गढ़ने की चरम उम्र के हैं।

इसी तरह से ट्रैन की पटरियों पर गुर्जर समाज के बड़े-बूढ़े और महिलाएं बीते 5 दिन से सरकार की तरफ़ नज़र एकटक गढ़ाकर बैठे हैं। इनमें से कइयों को तो सच में यह पता नहीं है कि वो यहां पर क्यों बैठे हैं। हमने कुछ लोगों से बात की तो यही सच्चाई सामने आई।

हालांकि हाइवे जाम कर बैठे नव युवकों से बात करने पर पता चलता है कि गुर्जर समाज को आरक्षण की बेहद सख्त जरूरत है। उनकी बातों में इस बार आरक्षण लेकर उठने का कॉन्फिडेंस है तो साथ ही सरकारों के प्रति गुस्सा भी है।

बताने की जरूरत नहीं है कि गुर्जर समाज पिछले 13 साल से आरक्षण की मांग को लेकर 6 बार आंदोलन कर चुका है, जिसमें 72 गुर्जर युवाओं की मौत आज भी समाज को रोष दिलाने के लिए पर्याप्त है।

यह भी याद हो कि गुर्जर समाज ने 5% फीसदी आरक्षण के लिए बीजेपी-कांग्रेस की सरकारों से खूब धौखा खाया है। इसी का नतीजा है कि गुर्जरों द्वारा इस बार आर या पार के साथ आरक्षण चिट्ठी के अलावा कोई भी आश्वासन को पूरी तरह खारिज किया जा चुका है।

5 दिनों में 5 राज्य आरक्षण आंदोलन की चपेट में आ चुके हैं। मुंबई रेलवे ट्रैक बन्द है। आगरा हाइवे जाम है। टोंक, अलवर, धौलपुर, सवाई माधोपुर और अजमेर में आरक्षण आंदोलन की आग फेल चुकी है। सरकार दो उच्च स्तरीय बैठक कर चुकी है।

सदन में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल और भारतीय जनता पार्टी उग्र होकर सरकार के खिलाफ हो चुके हैं। दोनों की तरफ से गुर्जरों को 5 फीसदी आरक्षण का लाभ देने के लिए दबाव बनाया जा चुका है।