university of rajasthan abvp protest

-एबीवीपी ने किया राजस्थान विवि के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन

जयपुर।
राजस्थान विश्वविद्यालय में सत्र 1992 से शुरू हुए जनसंचार केंद्र को राज्य सरकार द्वारा बंद करने के निर्देश दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

आज राजस्थान विवि के मुख्य द्वारा पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने उग्र प्रदर्शन किया।

परिषद के कार्यकर्ताओं ने यहां पर अशोक गहलोत सरकार पर नाकार होने का आरोप लगाते हुए ‘शिक्षा के मंदिर पर हमला बर्दास्त नहीं किया जाएगा’ के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान गेट पर चढ़ने से कई प्रदर्शकारियों के कपड़े भी फट गए।

परिषद के प्रांत मंत्री हुश्यार सिंह मीणा, अमित बड़बड़वाल, नितिन शर्मा, विजेंद्र महुआ समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं इस प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शन के बाद कुलपति प्रो. आरके कोठारी को सरकार के नाम पर ज्ञापन दिया गया और चेतावनी दी कि यदि सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेगी तो आने वाले वक्त में प्रदेशभर में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

परिषद के विवि इकाई प्रमुख सज्जन सैनी का कहना है कि स्थाई शिक्षक नहीं होने का जो बहाना बनाया गया है, उसके अनुसार तो देशभर में कई विश्वविद्यालयों में डिपार्टमेंट बंद हो जाएंगे।

किसके इशारे पर हो रहा है काम

जनसंचार बंद करने के मामले को हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि को संचालित करने से जोड़कर देखा जा रहा है।

यहां से पत्रकारिता कर बुलंदियों तक पहुंचे एल्युमिनाइयों के अनुसार सरकार ने हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि को फिर से शुरू किया गया है, लेकिन यहां पर कोई प्रवेश नहीं लेना चाहता है।

जिसके चलते कुछ लोगों द्वारा सरकार को गलत फीडबैक देकर इस 28 साल पुराने केंद्र को बंद करने की तैयारी की जा रही है।
कई जगह नहीं है स्थाई शिक्षक

विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, विवि में आजीवन सीनेट सदस्य और वरिष्ठ वकील डॉ. अखिल शुक्ला ने सवाल उठाते हुए कहा है कि राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन जनसंचार केंद्र में शिक्षक न होने का हवाला देकर पाठयक्रम को बंद करना चाहता है जो कि विद्यार्थियों के साथ अन्याय है।

विवि के कई केंद्र में स्थायी शिक्षक नहीं हैं वे फिर भी चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में जनंसचार केंद्र को बंद करना समझ से परे है।

उन्होंने बताया कि विवि में 1991-92 में स्ववित्त पोषित आधार पर यह केंद्र शुरू किया गया था। यहां की सभी सीट हर साल भर जाती है।

वर्तमान में भी 200 से अधिक विद्यार्थी हैं। विवि को केंद्र चलाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति सहित अन्य जरूरी कदम उठाने चाहिए।