जयपुर।

राजस्थान विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ अशोक सिंह की हैडशिप राजस्थान हाई कोर्ट ने डंडा चला दिया है।

कोर्ट ने डॉ अशोक सिंह की नियुक्ति पर रोक लगाते हुए तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ ओम महला को विभाग की जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिया है।

33 मार्च 2018 की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विवि के फैसले को स्टे कर दिया। कोर्ट ने 8 अप्रैल 2019 को दिए गए अपने फैसले में कहा है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष नियुक्त किया है, जो कि विश्वविद्यालय की एक अहम बॉडी, सिंडिकेट के रेजुलेशन का उल्लंघन है।

इसलिए इस नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रोक लगाते हुए तत्कालीन हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर ओम महला को जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है।

आपको बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 20 मार्च 2018 और 21 मार्च 2018 के अपने फैसलों में डॉ अशोक सिंह को, जो कि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, उनको लोक प्रशासन विभाग का विभागाध्यक्ष नियुक्त किया था, तब तत्कालीन हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर ओम महला का 3 साल का कार्यकाल पूरा हो गया था।

आपको यह भी बता दें कि विश्वविद्यालय के 34 डिपार्टमेंट्स में केवल लोक प्रशासन विभाग ही ऐसा डिपार्टमेंट है, जहां पर एसोसिएट प्रोफेसर होते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इस नियुक्ति के विरोध में HOD डॉ ओम महला हाईकोर्ट की शरण में गए थे, जिस पर कोर्ट ने यह लगाया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव को निर्देशित करते हुए कोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की इस नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रोक लगाते हुए तत्कालीन विभाग अध्यक्ष का कार्यकाल अनवरत जारी रखा जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए।

दरअसल, राजस्थान विवि सिंडिकेट के 16 अप्रैल 1992 को एक संसोधन किया था, जो कि रेजुलेशन 22 दिसम्बर 1985 का संसोधन था, के मुताबिक किसी भी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के होते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता।

आपको यह भी बता दें कि राजस्थान विश्वविद्यालय के ही ग्रेमेटिक डिपार्टमेंट में डॉ अर्चना शर्मा 2013 से लगातार विभागाध्यक्ष हैं, क्योंकि इस डिपार्टमेंट में उनके अलावा कोई प्रोफेसर है ही नहीं।

जबकि फाइन आर्ट्स में 3 एसोसिएट और प्रोफेसर हैं, जो बीते 20 साल से लगातार रोटेशन में विभागाध्यक्ष बन रहे हैं।

विश्वविद्यालय के सभी 34 डिपार्टमेंट्स में से केवल पब्लिक एड ही ऐसा है, जहां पर असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाया गया था, जबकि इस डिपार्टमेंट में डॉक्टर ओम महला एसोसिएट प्रोफेसर थे।

हालांकि उसके बाद मई माह के दौरान दो एसोसिएट प्रोफेसर और नियुक्त किए गए हैं, लेकिन उससे पहले मार्च में ही विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अशोक सिंह को विभाग की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिस पर कोर्ट ने स्टे लगाया है।

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