Censored book

नई दिल्ली।

दूरदर्शन न्यूज़ (DD NEWD) के वरिष्ठ पत्रकार और एंकर अशोक श्रीवास्तव ने एक पुस्तक लिखी है, “नरेंद्र मोदी सेंसर्ड (Censored )”। जिसमें उन्होंने कांग्रेस शासन के अंतर्गत दूरदर्शन में कार्य करने के दौरान अपने निजी अनुभवों द्वारा बताया है की कांग्रेस शासन में किस स्तर तक जाकर दूरदर्शन का राजनीतिक प्रोपगेंडा (propaganda) टूल के रूप में इस्तेमाल किया गया था

अशोक श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई यह पुस्तक (Censored book) 2004 से 2014 तक कांग्रेस के राज में मीडिया की निष्पक्षता स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के स्तर का विस्तारपूर्वक वर्णन करती है।

इस किताब में कांग्रेस द्वारा समय-समय पर निरंतर प्रियंका वाड्रा को भी प्रत्येक चुनाव से पूर्व इस्तेमाल करने की बात कही गई है, और उन्हें हर चुनाव से पूर्व रीपैकेज (repackaging) कर जनता के सामने प्रस्तुत करने के खेल का भी उल्लेख किया गया है। ठीक वैसा ही जैसा कि आप आज के समय में देख रहे हैं।

अपनी किताब में अशोक श्रीवास्तव बताते हैं कि 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई तो दूरदर्शन में बकायदा एक यूनिट (special unit) का गठन किया गया, जो विभिन्न स्टोरीज (stories), डॉक्युमेंट्रीज (documentary) और प्रोग्राम (propaganda) के द्वारा तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध गुजरात में गोधरा कांड के बाद हुई हिंसा को लेकर देश के राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन पर कांग्रेसी एजेंडा के अंतर्गत दुष्प्रचार किया करती थी।

कांग्रेस द्वारा मोदी के विरोधी दुष्प्रचार को फैलाने के लिए गठित हुए इस यूनिट में दूरदर्शन के हर कार्यकर्ता को घुसने की अनुमति भी नहीं थी, केवल कांग्रेसियों के विश्वासपात्र और कांग्रेस की गुडबुक्स (good books) में रहने वाले लोग ही इस यूनिट में अंदर आने की अनुमति रखते थे।

गुजरात दंगों पर कोर्ट में फर्जी एफिडेविट (fake evidence) दायर करने वाली और दंगा पीड़ितों की सहायता के नाम पर चंदा बटोरकर उस धन से विदेश यात्राएं, महंगे कपड़े खरीदने, महंगे होटलों में रहने, महंगी मेकअप किट खरीदने और महंगी शराब पीने वाली एक्टिविस्ट (activist) तीस्ता सीतलवाड़ उस यूनिट की विशेष और नियमित विजिटर थी।

गुजरात तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी के विरुद्ध गठित हुए इस दुष्प्रचार यूनिट का नाम था 123 सेल, और दूरदर्शन के कार्यालय (DD office) में लोग मजाक किया करते थे कि यह 123 सेल नरेंद्र मोदी को नौ दो ग्यारह करवा देगा।

कांग्रेस द्वारा दूरदर्शन में गठित यह दुष्प्रचार सेल (propaganda cell) कांग्रेस के पक्ष में फर्जी स्टोरियां भी चलाया करता था, और आम जनमानस के बीच कांग्रेस की छवि सुधारने और घोटालों (Scam) के समय कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने का कार्य करता था। यह विशेष मीडिया सेल हर वर्ष सोनिया गांधी का जन्म दिवस हर्षोल्लास से मनाता था।

2005 में जब तत्कालीन कांग्रेसी सरकार के दुष्प्रचार के कारण नरेंद्र मोदी को अमेरिकन वीजा (American visa) नकार दिया गया था, तो उस समय दूरदर्शन के दफ्तर में इसी मीडिया सेल (Media cell) ने मिठाइयां तक बाटी थी।

कांग्रेस राज के उस पूरे कालखंड में कभी किसी भी दूरदर्शन कर्मचारी ने इस प्रकार के एकपक्षीय एजेंडा (One side agenda) चलाने का विरोध नहीं किया। और उस दुष्प्रचार मीडिया यूनिट के लिए स्वयं कई कांग्रेसी नेता कंसलटेंट (Consistent) के रूप में कार्य कर रहे थे।

अपनी किताब में अशोक श्रीवास्तव बताते हैं की कांग्रेस ने सत्ता में आते ही दूरदर्शन से कई ऐसे पत्रकारों (Freelance journalist) की छुट्टी कर दी थी, जिन्हें कांग्रेस अपने एजेंडा चलाने की राह में रोड़ा मानती थी।

किताब में यहां तक बताया गया है कि 2007 के गुजरात चुनाव में दूरदर्शन की एडिटोरियल टीम (DD editorial team) कांग्रेस के नेताओं और तीस्ता सीतलवाड़ से दूरदर्शन पर प्रसारण किए जाने वाले कंटेंट (Content) पर निर्देश तक ले रही थी।

कांग्रेस के शासनकाल में दूरदर्शन में गठित यह दुष्प्रचार यूनिट यह सुनिश्चित करता था कि गुजरात से आने वाली हर सकारात्मक खबर (Positive news) और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हर उपलब्धि को चैनल पर ना चलाया जाए।

प्रयास था की नरेंद्र मोदी की हर उपलब्धि को जनता तक पहुंचने से किसी भी प्रकार रोका जाए, और गुजरात हिंसा को लेकर नरेंद्र मोदी के विरुद्ध एक जहरीला कैंपेन (Poisonous campaign) चलाकर मोदी की छवि एक खलनायक की बना दी जाए।

अशोक श्रीवास्तव ने इस किताब में उनके द्वारा लिए गए नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू में दूरदर्शन की एडिटोरियल टीम द्वारा की गई काट छांट, उस इंटरव्यू को सेंसर करने के प्रयासों और उस इंटरव्यू (Interview) को प्रसारित करने में जानबूझकर की गई देर का भी उल्लेख किया है।

आज फ्रीडम आफ एक्सप्रेशन (freedom of expression) के नाम पर देश विरोधी नारों तक को उचित ठहराने वाले लोग अवश्य यह पुस्तक पढ़ें, जिससे उन्हें समझ में आए कि जब कांग्रेस सत्ता में होती है तो अभिव्यक्ति की आजादी का स्तर क्या होता है।