जयपुर।
ग्राम पंचायत विकास योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, इसके लिए ग्राम पंचायत विकास योजना में प्रयास एवं चुनौतियाँ तथा समावेशी विकास में महिला सभाओं की भूमिका विषय पर वुधवार को इंदिरा गाँधी पंचायती राज संस्थान में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला दो सत्रों में सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चली। कार्यशाला में 50 अलग-अलग सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

“पंचायतों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखने की आवश्यकता” 1

पहले सत्र में ‘राजस्थान में ग्राम पंचायत विकास योजना- प्रयास एवं चुनौतियाँ‘ विकास पर चर्चा हुई. जिसमें राजस्थान सरकार के पंचायती राज संस्थान (आयोजना) के संयुक्त शासन सचिव सी. एम. मीणा, बाँसवाड़ा जिले की गणऊ ग्राम पंचायत की सरपंच गलब देवी, उन्नति संस्थान की स्वप्नी और पंचायती राज विभाग में सलाहकार पी. आर. शर्मा ने ग्राम पंचायत विकास योजना में किये जा रहे प्रयास और उसके लिए आ रही चुनौतियों पर बात की।

पंचायती राज संस्थान (आयोजना) के संयुक्त शासन सचिव सी. एम. मीणा ने ग्राम पंचायतों में सरकार की ओर से किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।

“पंचायतों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखने की आवश्यकता” 2

उन्होंने कहा, उप-मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि 14 नवम्बर को ‘मेरा गांव- मेरा गौरव’ मनाया जायेगा। इससे गाँव में पंचायतों की ताकत बढ़ेगी।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर सर्कुलर निकालती रहती है ताकि पंचायतों में महिलाओं की भूमिका ज्यादा से ज्यादा हो।

उन्नति संस्थान की कार्यक्रम प्रबंधक स्वप्नी ने ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं के बारे में बताया।

“पंचायतों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखने की आवश्यकता” 3

उन्होंने GPDP के क्रियान्वयन में पंचायतों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर बल देते हुए कहा कि,’पंचायत को योजना निर्माण में तकनीकी सहायता की जरूरत है लेकिन यह बिना जनभागीदारी के संभव नहीं है।’

पंचायती राज विभाग में सलाहकार पी. आर. शर्मा ने ग्राम पंचायत विकास योजना के लाभ और इसमें सरकारी कमियों के बारे में बात की।

शर्मा ने कहा कि सामाजिक संगठनों का सरकारी योजनाओं को जमीन पर लाने में अहम भूमिका होती है और इनसे सरकार को योजनाओं का फीडबैक मिलता है।

उन्होंने कहा, ‘महिला सरपंचों की पंचायतों में भागीदारी बढ़नी चाहिए और इसके लिए उनकी समय-समय पर ट्रेनिंग होनी चाहिये।

एक से बढ़कर एक खास वीडियो देखने के लिए यहां पर क्लिक करें

साथ ही पंचायतों में जन सहभागिता, महिला सभा, वार्ड सभा, समूह चर्चा बढ़नी चाहिए।’ इस सत्र का संचालन प्रिया के कार्यक्रम प्रबंधक डॉ अंशुमन करोल ने किया।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में ‘सहभागी विकेंद्रीकृत नियोजन और समावेशी विकास में महिला सभाओं की भूमिका ’ विषय पर चर्चा हुई।

इसमें प्रिया संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश टंडन ने मोडरेट किया. चर्चा में जयपुर जिले के भुतेडा ग्राम पंचायत सरपंच मीरा देवी नेतड ने ग्राम पंचायतों में महिलाओं के लिए आने वाले परेशानियों और उनके द्वारा उन समस्यायों के समाधान की कहानी बताई।

प्रिया के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी देबाशीष बिश्वास ने संस्थान की ओर से गोविन्दगढ़ और डूंगरपुर में महिला सभाओं द्वारा गावों में आ रहे बदलावों के बारे में बताया।

इसके बाद इंदिरा गाँधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान की डॉ अनीता ने कहा कि GPDP में विभागीय तालमेल की बात कही गयी है लेकिन आज हर विभाग अपनी ग्राम सभा आयोजित कर रही है।

इससे साल में 25 से 30 ग्राम सभाएं आयोजित हो रही हैं इससे ग्रामीणों में ग्राम सभों के प्रति रूचि कम हो रही है।

कार्यशाला में यूनिसेफ राजस्थान के सोशल पॉलिसी स्पेशलिस्ट शफ़क़त हुसैन ने सतत विकास के 17 लक्ष्यों को पंचायत स्तर पर समावेश करने की बात कही।

इन्होने बताया कि राजस्थान सतत विकास लक्ष्य संख्या 5 (लैंगिक समानता) को हासिल करने में देश में सबसे पीछे है।

“पंचायतों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखने की आवश्यकता” 4

कार्यक्रम के अंत में करीब 50 अलग-अलग सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों से आये प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे.
मुख्य सुझाव ये थे।

ग्राम पंचायतों में ट्रेनिंग कराने से पहले उसकी जरूरत का आंकलन होना चाहिए। विभिन्न सामाजिक संगठनो द्वारा किये गये प्रयासों का संकलन करके उसको भी प्रशिक्षण सामग्री में जोड़ा जाना चाहिए।

जिला एवं राज्य स्तर पर गैर सरकारी और जमीन पर काम करने वाले संस्थानों के साथ सरकारी संस्थानों और निजी संस्थानों का CSR का एक कॉमन प्लेटफार्म बनना चाहिए, जिसमे इस तरह की चर्चाएँ हो सकें।

हर ग्राम पंचायत में महिला सभाओं का आयोजन अनिवार्य होना चाहिए। इसके लिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम में उचित संशोधन करने की जरूरत है।

राज्य में स्थित सभी कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी के अध्यापकों और विद्यार्थियों को पंचायतों के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि पंचायतों के डेटा और अन्य जरूरतों में उनका सहयोग प्राप्त किया जा सके।

सबसे अंत में प्रिया की सहायक कार्यक्रम अधिकारी सीमा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया