लखनऊ।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने आज उत्तर प्रदेश में गठबंधन की घोषणा कर दी। घोषणा के मुताबिक समाजवादी पार्टी 38 और बहुजन समाज पार्टी भी 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सम्मुख बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बात की घोषणा करते हुए 2 सीट कांग्रेस के लिए खाली छोड़ी है, जबकि 2 सीट पर अन्य को देने की घोषणा की है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर 23 साल पुराने उस कांड का उल्लेख किया, जिसके चलते समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी इस दौरान एक दूसरे के साथ नहीं हो सके।

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बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 23 साल पहले, यानी 1995 में घटित हुए गेस्ट हाउस कांड को उन्होंने जनहित के लिए दरकिनार करते हुए समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया है।

इस अवसर पर मायावती ने कहा कि 1993 में तत्कालीन बसपा अध्यक्ष कांशीराम और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन किया था, और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच गलतफहमी हो गई और वह गठनबन्धन टूट गया।

मायावती के द्वारा जिस गेस्ट हाउस कांड की बात कही गई है, वह लंबे समय तक ना केवल चर्चा का विषय रहा, बल्कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी को 23 साल तक एक दूसरे के नजदीक नहीं आने दिया।

क्या है गेस्ट हाउस कांड आइए हम आपको बताते हैं-

1993 में कांशीराम और मुलायम सिंह यादव के द्वारा समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच में गठबंधन किया गया। यह वह समय था, जब 1991 के बाद देश में और खासतौर से उत्तर प्रदेश में जातियों और धर्म के नाम पर तुष्टिकरण का दौर चल पड़ा था।

लेकिन 1995 में ही दोनों के बीच गठबंधन टूट गया। सरकारी गेस्ट हाउस में मायावती गठबंधन के टूटने की घोषणा करने वाली थी, इस बात की भनक समाजवादी पार्टी के समर्थकों को लग चुकी थी।

इसलिए वहां पर काफी समर्थक एकत्रित हो गए और उन्होंने मायावती पर धावा बोल दिया। बताया जाता है कि सपा समर्थकों ने ना केवल मायावती के साथ मारपीट की, बल्कि बदसलूकी भी की।

इसके बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी और बहुजन समाजवादी पार्टी के बीच में गठबंधन हुआ और राज्य में नई सरकार का गठन किया गया। लेकिन मायावती और बसपा के समर्थकों ने कभी भी उस कांड को बुलाया नहीं।

जिसके कारण यह मामला मीडिया में तूल पकड़ गया। बाद में कभी भी मायावती और मुलायम सिंह यादव कभी साथ नहीं आए, लेकिन अब समय, काल और परिस्थिति बदल चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए सपा और बसपा ने 25 साल बाद फिर से गठबंधन किया है।

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