नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंड़ल में एक ऐसे नेता को भी जगह मिली है, जिसने कभी कांग्रेस की अध्यक्षा, यूपीए की चैयरपर्सन और राष्ट्रीय सलाहकार समिति की अध्यक्षा सोनिया गांधी का 2006 में हाथ पकड़ लिया था।

याद दिला दें कि बात साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के ठीक पांच दिन पहले की है। प्रदेश कांग्रेस की सरकार ने सोनिया गांधी से इस रिफाइनरी का उद्घाटन करवाया था।

उससे पहले साल 2006 में जब राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की। भी मौके थे। तभी यहां के युवा भाजपा नेता, जो कि जिला परिषद के चुनाव जीते हुए थे, ने सारी सुरक्षा व्यवस्था को छेदकर सोनिया गांधी का हाथ पकड़ लिया था।

बताया जाता है कि जब कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी, जिसने यहां पर बाढ़ पीड़ितों के लिए यूपीए सरकार द्वारा 6000 पैकेट भोजन पटकने से परेशान था। इसी के चलते युवा नेता ने सोनिया गांधी से हाथ पकड़कर जवाब मांगा।

हालांकि, तुरंत सुरक्षा व्यवस्था में लगे एसपीजी के जवानों ने उसको अलग कर दिया और कोई जवाब भी नहीं आया। उसके खिलाफ नेशनल लीडर की सुरक्षा में सेंधमारी करने के कारण केस दर्ज किया गया था।

आज वही युवा लीडर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में राज्यमंत्री बना है। हम बात कर रहे हैं बाड़मेर—जैसलमेर से सांसद चुने गए कैलाश चौधरी की।

यह वही कैलाश चौधरी हैं, जिन्होंने कभी 1998 के दौरान वार्ड पंच का चुनाव भी हार गए थे। उसके बाद उन्होंने ने जिला परिषद का चुनाव जीता।

लेकिन 2008 में बायतु से विधायक का चुनाव हार गए। इसके पांच साल बाद, 2013 में भाजपा ने उनको फिर से मौका दिया और इस बार कांग्रेस के हरीश चौधरी को हराकर विधायक बने।

2018 में कैलाश चौधरी बायतु से हरीश चौधरी ही फिर चुनाव हार गए। किंतु भाजपा में नाम और आरएसएस के सहारे कैलाश चौधरी को लोकसभा का टिकट मिला और अब 3.23 लाख वोटों से मानवेंद्र सिंह को हराकर सांसद बनने के बाद केंद्र में मंत्री बन गए हैं।

बताया जाता है कि साल 2013, जबकि कैलाश चौधरी महज जिला स्तर के नेता थे, तब उनके द्वारा सोनिया गांधी से हाथ पकड़कर जवाब मांगने का तरीका भाजपा को पंसद आया और उनको प्रमोट किया गया।

आपको बता दें कि बाड़मेर रिफाइनरी का दो बार उद्घाटन किया गया है। पहले 2013 में सोनिया गांधी ने किया और फिर उसके बाद कार्य शुभारंभ ठीक पांच साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, अब वहां काम शुरू हो चुका है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर में लगभग 4 अरब बैरल तेल के भंड़ार हैं। यहां के पचपदरा तहसील में रिफाइनरी से प्रतिदिन 200 कुओं से लगभग 1.75 लाख बैरल तेल का जल्द उत्पादन किया जाने लगेगा।

भाजपा का दावा है कि कांग्रेस सरकार के समय किए गए एमओयू और उसको रद्द कर दुबारा किए गए एमओयू में प्रदेश को हजारों करोड़ों की बचत हुई है। इधर, कांग्रेस के अनुसार बाड़मेर रिफाइनरी के माध्यम से भाजपा वोट बटोरने की कोशिश कर रही है।

उद्घाटन के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस के द्वारा ‘पत्थर लगाने से काम शुरू नहीं होता’। सुचारू तौर पर शुरू होने के बाद पचपदरा रिफाइनरी से प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल तेल उत्पादन होगा।

यहां पर प्रतिवर्ष लगभग 90 लाख टन कच्चा तेल रिफाइन करने की क्षमता है। इसमें से 25 लाख टन कच्चा तेल तो केवल बाड़मेर से निकाला जाएगा, 65 लाख टन कच्चा तेल गुजरात से आएगा।

बता दें कि लगभग 45 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट से लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी। फिर बता दें 2013 में चुनाव आचार संहिता लगने ही वाली थी, तब ठीक पांच दिन पहले सोनिया गांधी द्वारा कांग्रेस ने शिलान्यास का आयोजन करवाया था, किंतु काम नहीं किया गया था।