जयपुर।

राजस्थान के सबसे बड़े और हाल ही में मरीजों के मामले में देश के सबसे बड़े हॉस्पिटल घोषित हुए राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल ने और कीर्तिमान स्थापित किया गया है।

एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने 28 फरवरी को पहला सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया है। एसएमएस (SMS) अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक गुर्दा ट्रांसप्लांट वाले बच्चे का नाम पियूष शर्मा है, जिसकी उम्र करीब 14 वर्ष है।

विभागाध्यक्ष डॉ. विनय तोमर ने बताया कि लगभग 1 वर्ष पूर्व बच्चे की किडनी खराब होने का पता चला। उसके बाद उसके माता-पिता ने राजस्थान और आसपास के कई राज्य में गुर्दा बदलवाने की कोशिश की, किंतु कहीं से सफलता हासिल नहीं हुई। अंततः उन्होंने सवाई मानसिंह चिकित्सालय का दरवाजा खटखटाया।

मां ने दिया बेटे को जीवनदान, SMS hospital में राजस्थान का पहला गुर्दा प्रत्यारोपण 1

यहां पर नेफ्रोलॉजी विभाग की पूरी टीम ने शुरूआती उपचार, नियमित डायलिसिस तथा बुनियादी इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार कर गुर्दा प्रत्यारोपण करने लायक बनाया गया।

पीड़िता बच्चे की मां सुशीला देवी ने बताया गुर्दा प्रत्यारोपण की उनकी खुद की इच्छा थी। गुर्दा प्रत्यारोपण का यह ऑपरेशन यूरोलॉजी विभाग के डॉ. एसएस यादव, डॉ. धनंजय अग्रवाल, विनय मल्होत्रा और पीडियाट्रिक मेहता सीटीवीएस विभाग के डॉ. राजकुमार यादव, एचएलएल मैच करने वालीं डॉ. संध्या गुलाटी एवं एनस्थीसिया विभाग की डॉ वर्षा कोठारी के निर्देशन में नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम द्वारा किया गया।

मां ने दिया बेटे को जीवनदान, SMS hospital में राजस्थान का पहला गुर्दा प्रत्यारोपण 2

डॉक्टर्स के मुताबिक भारत में खानपान और जीवनशैली के बदलाव के कारण किडनी खराब होने की समस्या सामान्य हो गई है। वयस्कों में गुर्दा खराबी का मुख्य कारण मधुमेह, high blood प्रेसर, ग्लोमेरुलर डिजीज है।

जबकि बच्चों में मुख्य कारण जन्मजात विकृतियों जैसे रिनल ऐपलेशिया/डिस्प्लेशिया, कंजिनाइटल, अब्स्ट्रिक्टव, यूरोपैथी, रिफ्लक्स, नेफ्रोपैथी सिस्टिक डिजीज होते हैं।

शुरुआती अवस्था में निदान एवं इलाज से किडनी की खराबी कुछ हद तक बचाया जा सकता है। जैसा कि जबको पहले से पता है गुर्दा प्रत्यारोपण क्षेत्र में उत्तर भारत सवाई मानसिंह अस्पताल का अग्रणी स्थान है।

यहां प्रतिवर्ष काफी संख्या में जीवित एवं प्रत्यारोपण होते हैं, परंतु बच्चों में गुर्दा प्रत्यारोपण का सवाई मानसिंह चिकित्सालय का अनूठा मामला है।

इस प्रत्यारोपण की सफलता के बाद ना सिर्फ राजस्थान के बच्चों को इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी प्रत्यारोपण का लाभ मिल सकेगा।

यूरोलॉजी विभाग के ट्रांसप्लांट के लिए दानदाता का गुर्दा लेप्रोस्कॉपी तकनीक से निकालने की सुविधा उपलब्ध है, इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सवाई मानसिंह चिकित्सालय में पहले स्थान पर है।

साथ ही सरकारी क्षेत्र में किसी भी अस्पताल में पूरे भारत में सबसे अग्रणी स्तर पर है। राज्य की सरकार द्वारा चल रही योजनाओं के अंतर्गत राजस्थान के मरीजों का गुर्दा प्रत्यारोपण का ऑपरेशन अस्पताल में लगभग निशुल्क हो रहा है।

साथ ही राज्य सरकार की मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के विस्तार के बाद गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद के इलाज की लगभग सभी दवाइयां निशुल्क उपलब्ध हो रही है।

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