हमेशा से भाजपा के लिए आफत रही है शेखावाटी की सियासत, पढ़िए पूरा विश्लेषण-,

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-3 जिलों में 7 सीटें जहां या तो खाता ही नहीं खुला या एक-दो बार ही मिली जीत

जयपुर। राजस्थान में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत मिला। भाजपा ने 200 में से 163 सीटें जीतकर रेकॉर्ड बनाया। ऐसी सफलता कई दशकों तक राजस्थान में शासन करने वाली कांग्रेस को भी नहीं मिली।
भाजपा की इस ऐतिहासिक लहर में भी वह उन सीटों को जीतने में विफल रही जहां आज तक उसकी जीत का खाता भी नहीं खुल पाया है। कई सीटें तो ऐसी हैं जहां जनसंघ के जमाने से ही खाता नहीं खुला। कहीं जनसंघ के समय जीत की शुरुआत हुई तो भाजपा बनने के बाद जीत नसीब नहीं हुई। एक- दो बार जीत भी गई तो अगली बार जीतने के लिए फिर दशकों लंबा इंतजार। ऐसी सीटों में से कई सीटें शेखावटी क्षेत्र की हैं जहां भाजपा जीतने के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसी ही कुछ सीटों का विश्लेषण-

मंडावा-  न जनसंघ जीती न भाजपा, 13 चुनावों में 8 बार कांग्रेस रही विजेता

झुंझुनूं जिले की मंडावा विभाधसभा क्षेत्र से अभी तक भाजपा को जीत नसीब नहीं हुई है। वर्ष 1957 में अस्तित्व आई इस सीट से पहले भारतीय जनसंघ और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के जीतने के सारे प्रयास विफल ही रहे। यहां के 13 चुनावों में से 8 बार कांग्रेस, एक-एक बार सीपीआई, स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी (सेक्यूलर), जनता दल और निर्दलीय ने जीत हासिल की है। वर्ष 2013 में निर्दलीय नरेन्द्र कुमार ने जीते और भाजपा तीसरे स्थान पर रही।

नवलगढ़- कांग्रेस के साथ ही निर्दलीयों के लिए भी मुफीद रही सीट पर जनसंघ एवं भाजपा का नहीं खुला खाता, 5 बार कांग्रेस, 4 बार निर्दलीय जीते, झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ 

विधानसभा में भी मंडावा की तरह ही भारतीय जनसंघ और भाजपा की जीत का खाता नहीं खुल पाया है। यह सीट पर कांग्रेस के साथ ही निर्दलीय के लिए मुफीद रही है। यहां के 14 चुनावों में से 5 बार कांग्रेस, 4 बार निर्दलीय और एक-एक बार राम राज्य परिषद, स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी और जनता दल और बसपा विजयी रहे। वर्ष 2013 में यहां निर्दलीय राजकुमार शर्मा जीते और भाजपा तीसरे स्थान पर रही।

दातारामगढ़- भैरोंसिंह ने जनसंघ से जीतकर राजनीति की शुरुआत की पर भाजपा का नहीं खुला खाता

दातारामगढ़ में आजादी के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह ने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी लेकिन भाजपा के गठन के बाद से इस सीट पर उसका कोई प्रत्याशी नहीं जीत पाया है। अब तक हुए 14 चुनावों में से 8 बार कांग्रेस, 2 बार जनसंघ, एक-एक बार रामराज्य परिषद, निर्दलीय, जनता दल, सीपीएम ने जीत हासिल की है। वर्ष 2013 में यहां से कांग्रेस के नारायण सिंह जीते और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

फतेहपुर- जनसंघ नहीं खोल पाई खाता, भाजपा सिर्फ  एक बार जीती

वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई फतेहपुर सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। वर्ष 1957 के बाद हुए चुनावों में यहां से भारतीय जनसंघ इस सीट से नहीं जीत पाई। जनसंघ के बाद बनी भाजपा को भी यहां सिर्फ वर्ष 1993 में ही जीत नसीब हुई।
उसके बाद से ही भाजपा यहां से संघर्ष कर रही है। अब तक के 13 चुनावों में 6 बार कांग्रेस, 2 बार निर्दलीय, एक-एक बार स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी, सीपीएम, जनता दल और भाजपा विजयी हुई। वर्ष 2013 में यहां से निर्दलीय नंदकिशोर महरिया जीते और भाजपा को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

झुंझुनूं- जनसंघ का नहीं खुला खाता, भाजपा को एक बार जीत मिली। 14 में से 11 चुनाव जीती कांग्रेस

झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र वर्ष 1951 के चुनाव से कांग्रेस का गढ़ बनी हुई है। वर्ष 1951 के चुनाव नरोत्तम लाल जोशी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीतकर राजस्थान विधानसभा के पहले स्पीकर बने तो पहली और एकमात्र जीत का स्वाद चखने वाली भाजपा से वर्ष 2003 में जीतकर सुमित्रा सिंह राजस्थान विधानसभा की पहली महिला स्पीकर बनी। यहां के 14 चुनावों में से 11 बार कांग्रेस, एक-एक बार जनता दल, निर्दलीय और भाजपा ने जीत हासिल की। वर्ष 2013 में यहां से कांग्रेस जीती और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

लक्ष्मणगढ़- जनसंघ का नहीं खुला खाता, भाजपा एक बार जीती

वर्ष 1057 से अस्तित्व में आई लक्ष्मणगढ़ सीट पर भाजपा सिर्फ एक बार ही जीतने में कामयाब हो पाई जबकि उसकी पूर्ववर्ती पार्टी जनसंघ तो जीत का स्वाद ही नहीं चख पाई। यहां हुए 13 चुनावों में से 9 बार कांग्रेस, 2 बार स्वतंत्र पार्टी , एक-एक बार लोकदल और भाजपा जीते। वर्ष 2013 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा जीते और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

सरदारशहर- जनसंघ का नहीं खुला खाता, भाजपा को मिली दो बार जीत

सरदारशहर सीट से भले जनसंघ खाता नहीं खोल पाई लेकिन भाजपा को यहां शुरुआती दौर में ही सफलता मिली लेकिन दोबारा जीतने के लिए दो दशक से भी अधिक समय का इंतजार करना पड़ा।
भाजपा यहां पर 1980 में जीती लेकिन भाजपा के विधायक की मृत्यु के बाद 1982 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने वापस इस सीट पर कब्जा कर लिया। इसके बाद यहां से भाजपा 2008 में ही जीत पाई। यहां उपचुनाव समेत हुए 16 चुनावों में 9 बार कांग्रेस, 2 बार भाजपा और जनता दल, एक-एक बार निर्दलीय, जनता पार्टी , लोकदल विजयी हुए। वर्ष 2013 में यहां से कांग्रेस के भंवरलाल शर्मा जीते और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

सादुलपुर- जनसंघ का नहीं खुला खाता, भाजपा से दो बार सिर्फ कस्वां परिवार ही जीता

वर्ष 1962 में अस्तित्व में आई सादुलपुर सीट से भाजपा दो बार विजयी हुई और दोनों बार ही जीत का सेहरा कस्वां परिवार सिर ही बंधा। यहां उपचुनाव समेत हुए 13 चुनावों में से 8 बार कांग्रेस , 2 बार भाजपा , एक-एक बार जनता पार्टी,  निर्दलीय और बसपा जीती। वर्ष 2013 में यहां से बसपा के मनोज कुमार जीते और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।