नई दिल्ली।

संसद में सेरोगेसी विधेयक 2016 को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई। इस बिल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने बिल को पेश किया।

उन्होंने कहा कि इस बिल के जरिए सम्भवना है कि महिलाओं के उत्पीड़न पर रोक लगेगी। इसके साथ ही वाणिज्यिक सरोगेसी जन्म पर भी पूरी तरह से पाबंदी से मां और बच्चे के अधिकारों को संरक्षित किया जाएगा।

सरोगेसी बिल पर चर्चा के दौरान टीआरएस सांसद बीएन गौड ने कहा कि सरोगेसी सिर्फ आधुनिक विज्ञान नहीं है। बल्कि हिन्दू पौराणिक कथनों में भी इसका जिक्र है।

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उन्होंने कहा कि कृष्ण के भाई भगवान बलराम भी सरोगेसी से पैदा हुए थे। सांसद ने बताया कि देवकी के गर्भ को माया ने रोहिणी में ट्रांसफर किया था। रामायण से लेकर महाभारत में भी सरोगेसी का विवरण दिया गया है।

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि यह सामाजिक सरोकारों से जुड़ा बिल है और सरोगेसी मातृत्व से जुड़ा मुद्दा है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रजनन क्षमता होने के बावजूद भी कई मामलों में मां और पिता बच्चे पैदा करने में सक्षम नहीं हो पाते।

एमपी सुले ने कहा कि बिल बहुत अच्छा है, लेकिन इसे और आधुनिक बनाने की जरूरत है, जिससे हर दंपति बच्चे का सुख हासिल कर सके।

टीएमसी सांसद काकोली घोष ने सरोगेसी बिल के पक्ष में अपने विचार रखते हुए कहा कि अपने फैशन और फिगर के लिए बॉलीवुड स्टार्स सरोगेसी के जरिए माता-पिता बनते हैं जो पूरी तरह से बंद होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने व्यावसायिक सरोगेसी को अपराध की श्रेणी में लाकर इसे बैन किए जाने की मांग की। संसद में सेरोगेसी को लेकर बहुत बहस हुई।

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