जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन के साथ ही राजस्थान बीजेपी में अध्यक्ष पद की दौड़ भी शुरू हो चुकी है।

राज्य में जिन नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें आमेर से विधायक, प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया और जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का नाम सबसे ऊपर है।

हालांकि इन दोनों के नाम पर सहमति नहीं बनने पर तीसरे नाम के तौर पर अरुण चतुर्वेदी को आगे किया जा सकता है, जो पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं।

आज की तारीख में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खेमा पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुका है। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष बनाने को लेकर केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की ही चलेगी।

उनके द्वारा जिसका नाम तय किया जाएगा, उस पर एक ही बार में सहमति बनेगी इसमें कोई दो राय नहीं है। संघ के बेहद करीब होने के कारण सतीश पूनिया इस सूची में सबसे ऊपर हैं।

दूसरे नंबर पर राज्यवर्धन राठौड़ हैं, जो युवा हैं। राठौड़ पूर्व केंद्र मंत्री हैं और जयपुर ग्रामीण से दूसरी बार जीत कर आए हैं।

तीसरे नंबर पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी भी हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह की बातें सामने आ रही है, उससे साफ है कि सतीश पूनिया का नाम लगभग फाइनल किया जा चुका है।

बीते दिनों भी चर्चा हुई थी कि प्रदेशाध्यक्ष बदलने की कवायद शुरू हो चुकी है और नए अध्यक्ष के तौर पर सतीश पूनिया को कमान सौंपी जा सकती है, किन्तु मदनलाल सैनी के बीमार होने के कारण चर्चा बन्द हो गई थी।

अगर राजस्थान में पूर्व की भांति जातीय विद्वेषता सामने नहीं आती है तो सतीश पूनिया और राज्यवर्धन राठौड़ दोनों में से ही किसी एक को प्रदेश की कमान सौंपी जानी है।

लेकिन जिस तरह का राजस्थान में इतिहास रहा है, उसके अनुसार प्रदेश में जाट और राजपूत को लेकर ऐसे वक्त में भावनाएं भड़काने का काम किया जाता है, फिर पूनिया और राठौड़ से इतर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को फिर से अध्यक्ष बनाया जा सकता है।