नई दिल्ली।

भारत सरकार के द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान को लेकर बड़ा फैसला किया गया है।

केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए काम करने वाले तीन लोगों को प्रतिवर्ष सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम से सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया जाएगा।

यह सम्मान प्रतिवर्ष सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को दिया जाएगा। सम्मान राष्ट्रपति के द्वारा दिया जाएगा, जो कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है और कहा है कि प्रतिवर्ष केवल तीन व्यक्तियों को यह सम्मान दिया जाएगा।

यह सम्मान विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी सूरत में मरणोपरांत व्यक्ति को नहीं मिलेगा।

इसके साथ ही इस सम्मान के लिए व्यक्तियों के चयन हेतु एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री के सचिव, राष्ट्रपति के सचिव के अलावा राष्ट्रपति के द्वारा चुने हुए 3 गणमान्य लोगों की कमेटी होगी।

यह कमेटी प्रतिवर्ष आवेदन किए गए लोगों में से तीन सक्षम व्यक्तियों का चयन करेगी, जिनको राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

गौरतलब है कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की सभी देशी रियासतों को एक करने का बेजोड़ काम किया था, जिसके लिए उनकी अथक मेहनत को देश की एकता के रूप में देखा और समझा जाता है।

सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के पहले गृहमंत्री और प्रधानमंत्री भी थे।

राजस्थान की 22 रियासतों समेत देश की कुल 565 देशी रियासतों को एक करने का अदम्य साहस जुटाने वाले सरदार पटेल के नाम से यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का फैसला केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार ने किया है।

हालांकि इस पुरस्कार के वितरण के लिए अलग से कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा, पदम पुरस्कारों के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान ही गत 30 अक्टूबर को यह पुरस्कार भी दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भारत सरकार सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न के नाम से देती है।

इस पुरस्कार के तहत एक प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किया जाएगा। हालांकि पुरस्कार के रूप में कोई राशि नहीं होगी।

देशभर से इस पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाले लोगों के लिए एक विशेष वेबसाइट डिजाइन की गई है जो राज्य सरकार के द्वारा भी आवेदन किए जा सकते हैं।

विपक्ष के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि इस पुरस्कार की घोषणा के साथ ही केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी के कद को सरदार पटेल से छोटा करने का प्रयास शुरू कर दिया है।