जयपुर।

कहते हैं इतिहास अपने आप को दोहराता है, किन्तु इतना सटीक दोहराता है, ऐसा तो शायद किसी को विश्वास नहीं होगा।

जिस तरह से, जिस जगह पर, जितने जनों के साथ और जिस विमान से दस साल पहले, साल 2009 में भारतीय वायुसेना के साथ दुर्घटना घटी थी, बिलकुल उसी प्रकार से अब 2019 में घटना सामने आई है।

उतने ही 13 लोग, वही अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ी, वही ए-एन32 नामक वायुसेना का एयरक्राफ्ट और वही जून का महीना।

भारतीय वायुसेना के AN-32 लड़ाकू विमान को गुम हुए आज 5 दिन बीत चुके हैं।

वायुसेना के जवान, बीएसएफ के जवान, कई वायुयान तलाशी अभियान में जुटे हुए हैं, किन्तु कहीं कोई संभावना नहीं दिख रही है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने रक्षा मंत्रालय के माध्यम से तमाम प्रयास किये हैं, किन्तु आज भी सेना खाली हाथ है।वायुसेना के 13 वीर जवान उस विमान में सवार थे।

बताया जा रहा है कि यह प्लेन 40 साल पुराने हैं, जिनमें रडार सिस्टम भी अपग्रेड करने का काम हो रहा है, लेकिन जो विमान खोया है, उसमें विमान को राडार की प्रणाली से पकड़ने वाले सिस्टम पुराना ही था।

खास बात यह है कि बिलकुल इसी जगह, इसी श्रेणी के विमान, इतने ही जवानों की संख्या, यही जून का महीना था, जब 2009 में घटना घटित हुई थी।

कई दिनों की मशक्कत के बाद विमान पहाड़ी वाले घने जंगल में मिला था, और सभी जवान शहीद हो चुके थे।

तब वायुसेना ने तय किया था कि सभी विमानों की राडार प्रणाली को अत्याधुनिक किया जाएगा। जिसमें से 46 विमानों में नई तकनीक लगाई गई थी, लेकिन जिस कंपनी की यह तकनीक है, उसने नई तकनीक बनानी ही 2005 में बंद कर दी थी।

नतीजा यह निकला कि कई विमान पुरानी तकनीक में ही चल रहे हैं। दुःखद बात यह है कि खोया हुआ विमान भी पुरानी तकनीक वाले राडार वाला ही था।