22 C
Jaipur
सोमवार, अक्टूबर 26, 2020

किस तरह गांधी द्वारा समर्थित एक हिंदी अखबार ने मॉरीशस में जगाई थी स्वतंत्रता की अलख

- Advertisement -
- Advertisement -

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। देश को 1947 में आजादी मिलने से 46 साल पहले महात्मा गांधी 18 दिनों के लिए मॉरीशस गए थे और अपनी इस यात्रा में उन्होंने इस द्वीपीय देश में प्रवासी भारतीय श्रमिकों के अधिकारों के लिए पहला आंदोलन शुरू किया था।
भारतीय कामगारों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए उस वक्त महज 38 साल की उम्र में उन्होंने मीडिया को अपना अहम जरिया बनाया था। इसके लिए उन्होंने एक अनूठा प्रयोग करते हुए मॉरीशस में हिन्दी समाचार-पत्र हिन्दुस्तानी शुरू कराया, जो कि शायद भारत के बाहर हिन्दी में प्रकाशित होने वाला पहला हिन्दी अखबार था। इस काम की जिम्मेदारी गांधी ने अपने मित्र मणिलाल डॉक्टर को दी और उन्हें 11 अक्टूबर, 1907 को मॉरिशस भेजा।

मॉरीशस के स्वतंत्रता आंदोलन में मीडिया, विशेष रूप से हिंदी पत्रकारिता की प्रमुख भूमिका को बताती हुई एक किताब वरिष्ठ टीवी पत्रकार सर्वेश तिवारी ने लिखी है। इस किताब का नाम मॉरिशस : इंडियन कल्चर एंड मीडिया है। इस किताब में मॉरीशस में चलाए गए आंदोलन को बखूबी दर्शाया गया है, जिसका नेतृत्व भारतीय मूल के प्रवासी सेवूसागुर रामगुलाम ने किया था।

- Advertisement -satish poonia

रोचक बात है कि तीन दशक के बाद जब मॉरीशस ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ तो यही प्रवासी मजदूर रामगुलाम मॉरीशस के पहले प्रधानमंत्री बने थे।

वैसे हिंदुस्तानी अखबार को लॉन्च करने वाले गांधी के दूत मणिलाल डॉक्टर ने बैरिस्टर होने के नाते वहां भारतीय प्रवासी श्रमिकों के नागरिक अधिकारों के लिए लड़ाई भी लड़ी।

नागरिक अधिकारों के आंदोलन को मजबूत करने के लिए मणिलाल ने हिंदुस्तानी अखबार निकालने की शुरुआत पहले अंग्रेजी और गुजराती भाषा से की और बाद में इसे हिन्दी में निकाला। दरअसल, वहां बड़ी संख्या में भोजपुरी बोलने वाले भारतीय लोग थे। हिन्दी के इस अखबार का प्रभाव ऐसा पड़ा कि इसने तत्काल लोगों के दिलो-दिमाग पर कब्जा कर लिया।

जबकि 1900 की शुरूआत में जब यह हिन्दुस्तानी अखबार प्रेस से बाहर निकला था, उस वक्त मॉरीशस की मीडिया में फ्रेंच अखबार हावी थे। लेकिन हिन्दुस्तानी अखबार ने ऐसी ज्योत जलाई कि इसके प्रकाशन के कुछ ही सालों के अंदर मॉरीशस में दर्जन भर से ज्यादा हिंदी अखबार प्रकाशित होने लगे।

एक ओर जहां मॉरीशस में हिंदुस्तानी के कारण हिन्दी अखबारों का दबदबा बढ़ रहा था, वहीं दूसरी ओर इस अखबार से मिल रही प्रेरणा ने प्रवासी श्रमिकों के मन में स्वतंत्रता की भावना को जगाया था। कागज और इसकी सामग्री ने भारतीय प्रवासियों को एकजुट किया और उनमें स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का साहस जगाया।

गांधी के सिद्धांतों और भारतीय संस्कृति का असर इस देश पर ऐसा पड़ा कि अपनी स्वतंत्रता के इतने साल बाद आज भी मॉरीशस में हर क्षेत्र में भारतीयता की भावना नजर आती है।

लिहाजा इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराजसिंह रूपन ने कहा है, अगर हम भारत को मां कहते हैं, तो मॉरीशस बेटा है ..यही कारण है कि जो लोग सदियों से यहां रह रहे हैं वे अपनी जड़ों का पता लगाने के लिए उप्र और बिहार की यात्रा करना चाहते हैं।

जाहिर है अब मन में सवाल आएगा कि उप्र और बिहार ही क्यों? दरअसल, मॉरीशस में गन्ने की फसल लगाने के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर वहां गए थे। इनमें से ज्यादातर मजदूर उत्तर भारत के भोजपुरी भाषी बेल्ट के थे।

जो आंकड़े मिले हैं उनके मुताबिक 1834 और 1923 के बीच करीब 4.50 लाख भारतीय मजदूरों को अनुबंधित श्रमिकों के रूप में मॉरीशस लाया गया था। इनमें से 1.5 लाख अपना अनुबंध खत्म होने पर भारत लौट गए, जबकि बाकी मजदूर यहीं बस गए। आज भी इस देश में इनकी करीब 12 लाख की आबादी रहती है।

इस किताब के लेखक सर्वेश तिवारी ने मॉरीशस के इतिहास और महत्वपूर्ण घटनाओं का भी जिक्र किया है। इसके साथ वहां की स्थानीय आबादी के साथ उनके संवाद और 30 सालों के दौरान मॉरीशस की ढेरों यात्राओं के अनुभव भी इस किताब में है।

बता दें कि लेखक सर्वेश तिवारी ने शीर्ष भारतीय समाचार चैनलों के साथ काम किया है और वर्तमान में वे मॉरीशस ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के साथ जुड़े हुए हैं।

–आईएएनएस

एसडीजे/जेएनएस

National Dunia से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर लाइक और Twitter, YouTube पर फॉलो करें.

- Advertisement -
किस तरह गांधी द्वारा समर्थित एक हिंदी अखबार ने मॉरीशस में जगाई थी स्वतंत्रता की अलख 2
Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिआ संपादक .

Latest news

चीनी प्रतिनिधि ने बहुपक्षवाद का समर्थन देने की अपील की

बीजिंग, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित चीनी स्थाई प्रतिनिधि च्यांग ज्वून ने 24 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर वीडियो...
- Advertisement -

पडिकल की तकनीक हेडन की तरह : मौरिस

दुबई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के बल्लेबाज देवदत्त पडिकल की तकनीक आस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन के समान है। यह कहना है बेंगलोर...

आईपीएल-13 : चेन्नई ने बेंगलोर को 8 विकेट से हराया

दुबई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। चेन्नई सुपर किंग्स ने रविवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए आईपीएल-13 के 44वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर...

मप्र को कलंकित करने में जुटी भाजपा : कमल नाथ

भोपाल, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के एक और विधायक ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद भाजपा का दामन थाम...

Related news

सरकार को 10 दिन समय, बेरोजगार फिर आंदोलन की राह तलाशेंगे: यादव

-अधिकारियों की तानाशाही और मंत्रियों की लापरवाही को लेकर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने आंदोलन की दी चेतावनी, सरकार को दिया 10...

भाजपा ने बागियों के खिलाफ लिया एक्शन, कांग्रेस क्यों पीछे हटी?

जयपुर। जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों के लिए चुनाव की तैयारियां भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के द्वारा...

आईपीएल-13 : मुम्बई ने चेन्नई को 10 विकेट से हराया

शारजाह, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुम्बई इंडियंस ने शुक्रवार को यहां खेले गए आईपीएल के 13वें सीजन के 41वें मैच में चेन्नई सुपर किंग्स को...

कांग्रेस नहीं बना पाई प्रदेश कार्यालय, भाजपा ने उससे बड़े जिला कार्यालय बना दिये

जयपुर। कांग्रेस पार्टी भले ही करीब 55 साल तक राजस्थान की सत्ता पर राज करती रही हो, लेकिन आज तक भी कांग्रेस...
- Advertisement -