ashok gehlot sachin pilot
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जयपुर।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट की विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई ताबड़तोड़ हार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक पायलट की 8 हार हो चुकी है।

सबसे पहले विधानसभा चुनाव में खुद की मर्जी से टिकट नहीं बांट पाए, फिर चुनाव परिणाम के बाद खुद सीएम नहीं बन पाए, जबकि पांच साल से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए गर्त में समा चुकी कांग्रेस को उबारने का काम किया था।

इसके बाद प्रदेश सरकार के मंत्रीमंडल का अपनी मर्जी से नहीं चुन पाए और न ही मंत्रीमंडल का बंटवारा भी अपने मुताबिक कर पाए। खुद केवल उप मुख्यमंत्री जैसी हल्की पोस्ट लेकर ठंडे बस्ते में हैं।

लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक उनको अशोक गहलोत के सामने लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा है। कहना गलत न होगा कि अशोक गहलोत के सामने सचिन पायलट ‘राजनीतिक बच्चे’ ही साबित हुए हैं।

लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही पीसीसी चीफ पायलट ने कहा था कि न तो प्रदेश का मंत्री चुनाव लड़ेगा और न ही कोई विधायक, जबकि कांग्रेस ने कई विधायकों को लोकसभा चुनाव में उतार दिया है।

जानकारों की मानें तो अशोक गहलोत को नियंत्रित करने के लिए पायलट ने यह भी कहा था कि उनके परिवार से कोई सदस्य लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगा।

किंतु यहां पर भी पायलट को गहलोत की चतुराई के सामने पस्त होना पड़ा है। पायलट के तमाम रुकावटी बयानों दरकिनार कर गहलोत अपने बेटे को लोकसभा का टिकट दिलाने में कामयाबी हो गए।

इस तरह से देखा जाए तो राजस्थान में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत के सामने सियासी तौर पर पीसीसी चीफ सचिन पायलट टिक नहीं पा रहे हैं।

सचिन पायलट सहित अन्य कांग्रेसियों द्वारा किए गए हर जतन के बावजूद अशोक गहलोत ने साबित कर दिया है कि उनके बराबर अभी राजस्थान की कांग्रेस में कोई नेता नहीं है।