rahul gandhi priyanka gandhi wadra
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नई दिल्ली।

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2019) में मिली करारी हार से कांग्रेस पार्टी उबर नहीं पा रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा इस्तीफा देने पर अड़ने के बाद एक अपुष्ट बड़ी खबर सामने आ रही है।

बताया जा रहा कि अगर सचिन पायलट को कहीं ओर भेजा जाता है, या ऐसा कोई फैसला लिया जाता है कि उनको अब भी अशोक गहलोत का डिप्टी बनाकर रखा जाता है तो सचिन पायलट पार्टी छोड़ सकते हैं।

बता दें की राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के 100 विधायक हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के 73, बहुजन समाज पार्टी के 6, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन भारतीय ट्राईबल पार्टी के दो, कम्युनिस्ट पार्टी के दो, राष्ट्रीय लोक दल का एक और 13 निर्दलीय विधायक हैं।

मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस पार्टी में जारी तनाव के बीच सचिन पायलट के पार्टी छोड़ने के संकेत सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि यह बात तब शुरू हो गई थी जब 5 बरस तक मेहनत करने के बावजूद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और उनके ऊपर अशोक गहलोत को सौंप दिया गया।

हालांकि तब सचिन पायलट को लोकसभा चुनाव के परिणाम तक ठहरने के लिए कहा गया था, लेकिन अब जबकि कांग्रेस पार्टी अशोक गहलोत के नेतृत्व में सभी 25 सीटों पर हार चुकी है तब वादे के मुताबिक कांग्रेस पार्टी द्वारा सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था।

लेकिन अशोक गहलोत ने एक बार फिर से दबाव बनाकर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनने से रोका जा रहा है, ऐसे में यह बात सामने आई है कि अगर अब पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वह कुछ विधायकों को लेकर पार्टी से अलग हो सकते हैं।

वह निर्दलीय विधायकों और भारतीय जनता पार्टी के विधायकों को मिलाकर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।

बताया यह भी जा रहा है कि अशोक गहलोत के द्वारा सचिन पायलट को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री और पीसीसी अध्यक्ष से हटाकर किसी दूसरे राज्य में अध्यक्ष बनाए जाने का सुझाव दिया गया था।

जिसकी भनक सचिन पायलट को लगने के बाद उन्होंने यह कड़ा रूख अख्तियार किया है। इसके बाद यह भी बताया जा रहा है कि अगर राहुल गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रहते हैं तो सचिन पायलट पार्टी छोड़ सकते हैं।

आपको बता दें कि सचिन पायलट और राहुल गांधी की दोस्ती जगजाहिर है, यदि राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष नहीं रहते हैं और ताकत के साथ नहीं रहते हैं तो सचिन पायलट के लिए कांग्रेस पार्टी में सवाई करना बेहद कठिन हो जाएगा। ऐसे में उनके पास यह कदम उठाने का अवसर है।