Jaipur

चुनाव आयोग (election commission) द्वारा शनिवार को नागौर की खींवसर (khimsar) और झुंझुनूं की मंड़ावा (mandawa) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (by-election) की तारीख का ऐलान करने के बाद राजनीतिक दलों (political parties) की धड़कनों ने भी रफ्तार पकड़ ली है।

भाजपा (bjp) की तरफ से रविवार को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष (ex president) अरूण चतुर्वेदी को यह जानने के लिये नागौर भेजा गया है कि खींवसर में चुनाव लड़ने की भाजपा की कितनी गुंजाइश है।

इतना ही नहीं चतुर्वेदी यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि अगर भाजपा ने खींवसर में गठबंधन (alliance) नहीं किया तो क्या भाजपा जीत सकती है।

इसी तरह से उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ को झुंझुनू प्रभारी होने के नाते मंडावा में भारतीय जनता पार्टी की संभावनाओं के लिए भेजा गया है। वह भाजपा के नेताओं के साथ वार्ता कर रालोपा के साथ गठबंधन पर भी अपनी रिपोर्ट देंगे।

दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट की लड़ाई शुरू भी हो गई है। टिकट पाने की दौड़ में लगे नेता अपने आकाओं के यहां पर दौड़-धूप शुरू कर चुके हैं।

मंड़ावा विधानसभा सीट से दिसंबर 2018 में महज कुछ ही अंतराल से चुनाव हारने वाली रीटा चौधरी एक बार फिर से दावेदार हैं, तो साथ ही कुछ अन्य दावेदार भी सामने आ रहे हैं।

यहीं पर रालोपा (rashtriy loktantrik party) के संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी अपना उम्मीदार उतारने की ताल ठोक चुके हैं।

यदि सबकुछ ठीक रहा तो यहां से रालोपा दौलतसिंह महला को मैदान में उतार सकती है।

यह स्थिति कांग्रेस के लिये बेहद कठिन रास्ता साबित हो सकती है, तो भाजपा के लिये दोहरी परेशानी पैदा कर सकती है।

रालोपा (rlp) के नेता हनुमान बेनीवाल पिछले दिनों यह कहकर सियासत को हवा दे चुके हैं कि गठबंधन लोकसभा के लिये था, और आगे यदि स्थितियां अनुकूल रही, तभी भाजपा के साथ गठबंधन किया जायेगा।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अगर भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का प्रमोशन करती है, या उनको फिर से 2023 के लिये सीएम कंडीडेट बनाती है तो वह गठबंधन नहीं करेंगे।

बेनीवाल के उस बयान के बाद भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी ने कहा था कि किसको क्या बनाना है और किसको क्या नहीं बनाना है, यह भाजपा का अंदरुनी मामला है, इसके लिये किसी बाहरी व्यक्ति से पूछने की जरूरत नहीं है।

अब प्रभार होने के नाते चतुर्वेदी नागौर गये हैं, जहां पर वे भाजपा के जिलाध्यक्ष समेत अन्य भाजपाइयों से मुलाकात कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

अगर भाजपा के नेताओं ने वहां पर चुनाव लड़ने की परिस्थियों के प्रतिकूल होने का फीडबैक देते हैं तो संभवत: भाजपा रालोपा के साथ गठबंधन करने का विकल्प रखेगा।

इसी तरह से मंड़ावा में भी यदि भाजपा को लगता है कि रालोपा के बिना चुनाव जीतना संभव नहीं होगा, तो यहां पर भी रालोपा और भाजपा का गठबंधन होना तय है।

वैसे जो स्थितियां हम अभी देख पा रहे हैं, उससे साफ संकेत है कि गठबंधन के तहत खींवसर की सीट रालोपा को और मंड़ावा की सीट भाजपा को मिल सकती है।

ऐसी स्थिति में कांग्रेस की राह करीब करीब बेहद कठिन हो जायेगी।

इन दोनों सीटों पर होने वाला गठबंधन भाजपा और रालोपा के आगे के रिश्तों को भी तय करेगा। निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव में भी इन दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

खासकर पश्चिमी राजस्थान में, जहां पर बेनीवाल का अच्छा खास प्रभाव है, वहां पर दोनों के बीच पेचअप (alliance) होगा।

फिलहाल जोड़तोड़ की गणित शुरू हो चुकी है। हनुमान बेनीवाल करीब एक माह पहले ही खींवसर और मंड़ावा में अनौपचारिक तौर पर प्रचार रैलियां शुरू कर भाजपा को चेतावनी दे चुके हैं।

इधर, कांग्रेस पार्टी के पास मंडावा से जहां रीटा चौधरी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं हनुमान बेनीवाल के खौफ में खींवसर से कोई उम्मीदवार सामने नहीं आ रहा है