13 point roster 200 point roster
13 point roster 200 point roster

New Delhi.

अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को उच्च शिक्षण संस्थानों में भर्ती दिलाने में सहायक होने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 8 मार्च को लाया गया अध्यादेश (200 point roster ordinance) भी फायदा नहीं दे पाएगा।

भले ही मोदी सरकार ने Allahabad High Court और Supreme Court के विरुद्ध अध्यादेश जारी किया हो, लेकिन इसके अगले ही दिन यानी 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार के अध्यादेश को भी चुनौती दे दी गई है।

अब यदि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के इस अध्यादेश पर रोक लगाता है, तो देश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के करोड़ों युवाओं के द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक भर्ती के लिए पार्टिसिपेट करने के सपने पर पानी फिर जाएगा।

इससे पहले सोमवार को ही देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इस बहुजन वर्ग (SC,ST,OBC) के द्वारा धरने प्रदर्शन किए गए थे, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 8 मार्च को अध्यादेश लाने का ऐलान किया। लेकिन 9 मार्च को ही एक बार फिर से अध्यादेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई है।

आपको यह भी बता दे के इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 200 प्वाइंट रोस्टर को निरस्त करते हुए 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करने के फैसले के बाद देश के बहुजन समाज में गहरा रोष व्याप्त था, जिसको शांत करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने यह अध्यादेश जारी किया था।

अध्यादेश के बाद में ऐसा लग रहा था कि अब अप्रैल 2017 से विश्वविद्यालयों में रुकी हुई शिक्षक भर्ती फिर से शुरू हो सकेगी, लेकिन करीब 6000 पदों पर लंबित भर्तियां एक बार फिर से ठंडे बस्ते में चली जाएगी, ऐसा लग रहा है।

दरअसल 200 प्वाइंट रोस्टर की जगह 13 point roster लागू होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक भर्ती के लिए रास्ते लगभग बंद हो जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि 13 point roster प्रभाव में आने के बाद विश्वविद्यालय के बजाय विभाग को यूनिट मानकर भर्ती की जाती है, जिसके चलते आरक्षण का संवैधानिक नियम निष्प्रभावी हो जाता है।

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