भाजपा से राजपूत समाज इसलिए है नाराज, 22-23 को दिखाएगा अपना राजनीतिक दम—

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान में बीजेपी की राज्य सरकार को पांच साल पूरे होने जा रहे हैं। उससे पहले राजस्थान की राजनीति में उथल पुथल मचा हुआ है। यहां पर नवंबर में चुनाव प्रस्तावित हैं। दिसंबर की 13 तारीख को राज्य में नई सरकार का गठन हो जाएगा।

लेकिन राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में अब तक भाजपा का परम्परागत वोट बैंक माना जाने वाला राजपूत समाज बीजेपी से खासा नाराज बताया जा रहा है। इसको लेकर बयानबाजी जारी है।

इसी नाराजगी को खुले तौर पर जताने के लिए शनिवार को राजपूत समाज पचपदरा में एक विशाल रैली का आयोजन करने जा रहा है। जिसका नेतृत्व करेंगे पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह जसोल के बेटे और शिव से भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह करेंगे।

इसको स्वाभिमान रैली करार दिया गया है। इस रैली को लेकर मानवेंद्र सिंह और उनकी पत्नी बीते कई दिनों से राजपूत समाज के साथ ही पश्चिमी राजस्थान में घूम-घूमकर लोगों से सहयोग मांग रहीं हैं।

बताया जा रहा है कि जसवंत सिंह जसोल के स्वाभिमान के बहाने मानवेंद्र सिंह अपनी राजनीतिक शक्ति का परिचय देने जा रहे हैं। जिसे राजपूत समाज की आन-बार-शान से जोड़ दिया गया है।

हालांकि, मुद्दा समाज के अपमान को बनाया गया है, लेकिन इसमें कई चीजें समाई हुई है। पूर्व मंत्री जसवंत सिंह को साल 2014 में हुए आम चुनाव के वक्त भाजपा ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद वो निर्दलीय चुनाव लड़े थे।

जसवंत सिंह लोकसभा का चुनाव हार गए थे। बाद में एक हादसे के कारण सिंह कोमा में चले गए। आज भी उनकी हालत वही बनी हुई है। जसवंत सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भाजपा ने मानवेंद्र सिंह से भी दूरियां बना ली थीं।

बीते साढ़े चार साल से राजनीतिक तौर पर गुमनामी की जिंदगी जी रहे मानवेंद्र सिंह अब अपनी सियासी ताकत को दिखाने की कोशिश करने रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्वाभिमान रैली को चुना है।

पश्चिमी राजस्थान में जसवंत सिंह का कद व सम्मान किसी से छिपा नहीं है। भाजपा के द्वारा टिकट नहीं मिलने के बाद वो खासे नाराज थे, लेकिन अब सक्रिय राजनीति में नहीं होने के कारण उनके दर्द को मानवेंद्र सिंह बुलंद करने जा रहे हैं।

इलाके में लोगों से मिलकर मानवेंद्र सिंह इस बात को हवा दे रहे हैं कि राजपूत समाज के साथ बीते साढ़े चार साल में हुए अपमान का बदला चुकाने का वक्त आ गया है।

ज​बकि, उनके द्वारा कांग्रेस पार्टी का दामन थामने की चर्चा भी जोरों पर है। इसको हवा दे रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। गहलोत कई बार बयान देकर कह चुके हैं कि राजपूत समाज के साथ बीजेपी ने अन्याय किया है।

अब बात करते हैं जसोल के अपमान के अलावा अन्य राजपूत मुद्दों की। जसवंत सिंह को टिकट नहीं देने के अलावा राजपूत समाज चतर सिंह एनकाउंटर, आनदंपाल सिंह एनकाउंटर, सामराउ प्रकरण और उसके बाद समाज के नेताओं पर दर्ज हुए आपराधिक मामलों को लेकर भी राजपूतों में रोष है। आरक्षण एक पुराना मुद्दा भी इसमें जुड़ गया है।

समाज के लोगों ने बुधवार को ही कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की है। अलवर के पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह ने समाज के नेताओं को रा​हुल से मिलवाया है।

इस अवसर पर राहुल गांधी ने समाज के लोगों को आश्वासन दिया है कि यदि राज्य में कांग्रेस की सरकार आई तो राजपूत समाज पर लगाए गए सभी गलत मामले वापस लिए जाएंगे।

इधर, रावणा राजपूत समाज भी 23 सितंबर को जयपुर में सम्मेलन करने जा रहा है। समाज के अध्यक्ष रणवीर सिंह सोडाला का कहना है कि समाज को आजादी के 72 साल बाद भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

इसको लेकर समाज यह सम्मेलन करने जा रहा है। यहां विद्याधर नगर में पूर्व मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत स्मारक के पास सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।