-आरएफएफ की संगोष्ठी में फिल्मी दुनिया के लोगों ने की राज्य सरकार से मदद की अपील
जयपुर।

राजस्थानी सिनेमा को भी एक push (धक्का) की जरूरत है। यदि राज्य सरकार, यहां के धनाढ्य लोग और फिल्मकार एक push लगा लें तो राजस्थानी सिनेमा भी भोजपुरी, पंजाबी, मराठी, गुजराती जैसे आगे बढ़ सकता है।

राजस्थान film festival के तहत आयोजित संगोष्ठी में अभिनेता व निर्माता-निर्देशक सतीश कौशिक, अभिनेता श्रेयस तलपड़े और फिल्म समीक्षक कोमल नाहटा का यह कहना था।

सतीश कौशिक ने कहा कि छोटे राज्यों से आज बड़ी कहानियां मिल रही हैं। सिनेमा छोटे शहरों की ओर जा रहा है। दंगल, बरेली की बर्फी समेत कई फिल्में इसका उदाहरण हैं।

फिल्मों से tourism बढ़ता है। यश चोपड़ा हिंदी फिल्मों को स्विट्जरलैंड ले गए और वहां का टूरिज्म बढ़ गया। राजस्थान में भी वही संभावनाएं हैं।

यहां location और कहानियों का कमी नहीं है। bollywood से लेकर bollywood तक के फिल्मकार यहां shooting के लिए आते हैं।

Regional फिल्मों में भी वहीं संभावना है। बस सरकार को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है।

सरकार के सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाबी, भोजपुरी, बंगाली, गुजराती, मराठी सिनेमा सरकार के सहयोग से खड़ा हुआ है।

उत्तर प्रदेश में तो फिल्म पर 50 लाख रुपए की subsidy है। यदि ऐसा हो जाए तो राजस्थानी सिनेमा भी खड़ा हो जाएगा।

कौशिक ने कहा कि अब तो sub title से फिल्म दुनिया के किसी भी कोने में चलाई जा सकती है।

कैसे खड़ा होगा राजस्थानी सिनेमा? सवाल के जवाब में कौशिक ने कहा कि किसी एक आदमी को बीड़ा उठाना पड़ेगा।

एक ना एक दिन राजस्थानी फिल्में दौड़ेंगी, लेकिन हौंसला रखना होगा। मराठी फिल्मों की सफलता का जिक्र करते हुए श्रेयस तलपड़े ने कहा कि मराठी सिनेमा की progress के पीछे महाराष्ट्र सरकार भी है।

सरकार की फिल्म सब्सिडी नीति के कराण फिल्मकार आगे आए। अब तो मराठी क्या पंजाबी, गुजराती और भोजपुरी फिल्में बॉलीवुड की हिंदी फिल्मों को टक्कर दे रही हैं।

Film समीक्षक कोमल नाहटा ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार से राजस्थानी cinema को मदद नहीं मिल रही है।

Multiplex मदद नहीं कर रहे हैं। सब्सिडी मात्र 5-10 लाख है और वो भी फिल्म रिलीज से पहले मिलती है, जो उचित नहीं है।

इसी कारण बड़ी संख्या में फिल्में रिलीज ही नहीं हो पाती हैं। सरकार को बाकी राज्यों की तरह नीति बनानी चाहिए।

भोजपुरी और राजस्थानी फिल्मों की अभिनेत्री नेहाश्री ने कहा कि राजस्थानी सिनेमा के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। state government को सही नीति बनाने की जरूरत है।

सभी ने एक सुर में बोला कि छोटे शहरों में यूं ही सिनेमाघर बनने चाहिए, जैसे अमेरिका और चीन में हैं।

बड़ी फिल्मों के विपरीत छोटे बजट की फिल्मों की टिकट भी सस्ता होना चाहिए।

संगोष्ठी में अभिनेता राजेश पुरी, जयपुर के निवासी और अभिनेता अनिरुद्ध दवे, बीकानेर निवासी और पंजाबी फिल्मकार अनिरुद्ध सिंह, भोजपुरी सिनेमा के निर्देशक रीतेश ठाकुर भी मौजूद थे।

Award से परे हैं अमिताभ बच्चन
जब अभिनेता, निर्माता-निर्देशक सतीश कौशिक से पूछा गया कि क्या अमिताभ बच्चन को देर से दादा साहेब falke award मिला?

तो उनका कहना था कि अमिताभ तो अवॉर्ड से परे हैं। आज भी वो बच्चों की तरह काम करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि देर से अवॉर्ड मिलने का उन्हें बुरा लगा होगा।

बॉलीवुड के हीमैन धर्मेद्र का जिक्र करते हुए कौशिक ने कहा कि उन्हें आजतक अवॉर्ड नहीं मिला, जबकि बॉलीवुड की बिना धर्मेंद्र कल्पना नहीं की जा सकती है।

मैं नहीं जाऊंगा फिल्म डेट पर – श्रेयस

बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने बताया कि आंध्र प्रदेश में तो युवा डेट पर भी फिल्म देखने जाते हैं।

यही कल्चर अब मराठी सिनेमा में बढ़ रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो फिल्म डेट पर जाएंगे? उनका रिएक्शन था, मैं फिल्म डेट पर जाऊंगा तो पत्नी कचूमर निकाल देगी।