डूंगरपुर उपद्रव पर भड़के बेनीवाल, गहलोत सरकार को बताया जिम्मेदार

-डूंगरपुर-बांसवाड़ा क्षेत्र में हुए उपद्रव की जांच एनआईए से करवायें राज्य सरकार, नक्सलवाद की आशंका प्रदेश के लिए अशुभ संकेत
-डूंगरपुर -बांसवाड़ा क्षेत्र में हुए आंदोलन पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने दी प्रतिक्रिया

जयपुर। राजस्थान के डूंगरपुर-बांसवाड़ा में टीएसपी क्षेत्र में रीट भर्ती 2018 के 1167 पदों के बहाने आंदोलन को लेकर अब मामला नक्सलवाद की तरफ उड़ता हुआ नजर आ रहा है।

डूंगरपुर कांकर डूंगरी में में 7 अगस्त से आदिवासी क्षेत्र के अभ्यार्थी आंदोलन कर रहे थे। पिछले गुरुवार को उनके खिलाफ महामारी एक्ट के उल्लंघन के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने उदयपुर अहमदाबाद हाईवे को जाम कर लिया।

इस प्रकरण को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का कहना है कि जो आंदोलन हुआ, उस पर सरकार को तत्काल सुप्रीम कोर्ट जाकर संवैधानिक हल निकालना चाहिए। आंदोलन जिस मोड़ पर आया, उसमें राजस्थान सरकार की संवेदनहीनता व सरकार तथा पुलिस के इंटेलिजेंस का फैलियर भी बड़ा कारण रहा है।

आरएलपी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने जारी प्रेस बयान जारी कर कहा है कि सांसद ने कहा कि इतना बड़ा आंदोलन घटित हो जाना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि सरकार को अनुसचित जनजाति के हितों की कोई परवाह नही है और राज्य का खुफिया तंत्र चदर ओढ़कर सो रहा था।

क्योंकि सरकार समय रहते अभ्यर्थियों के साथ वार्ता करती तो निश्चित तौर पर कोई न कोई हल निकलता। चूंकि टीएसपी क्षेत्र में अलग से आरक्षण का प्रावधान है, इसलिए टीएसपी क्षेत्र में विकास करवाने व वहां के लोगो को सामाजिक व आर्थिक रूप से समृद्ध करने की बात पर सरकार को गौर करने की जरूरत है।

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सांसद ने कहा कि यदि मौजूदा भर्ती में खाली रहे पदों को अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों से भरे जाने में किसी प्रकार की संवैधानिक अड़चन आ रही थी, तो समय पर सरकार को आंदोलनकारियों के साथ वार्ता करके सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था।

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एनआईए से हो जांच
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की सरकार व सरकार के अधिकारी जब यह कह रहे हैं कि झारखंड तथा छत्तीसगढ़ सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों व एक विशेष विचारधारा के लोगों ने यहां आकर आंदोलन को हिंसात्मक रुख दिया जो प्रदेश के लिए भी अशुभ संकेत है।

बेनीवाल ने कहा कि प्रदेश के एक कोने से इस प्रकार आंदोलन का होना और उसमें भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का हाथ होना प्रदेश के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

यह सब जब राज्य सरकार व सरकार के अफसरों के संज्ञान में था, तो समय रहते राज्य सरकार ने उन पर कार्यवाही क्यों नहीं की। यह भी अपने आप में राजस्थान सरकार पर बड़ा सवालिया निशान है।

इसलिए राजस्थान सरकार को बिना किसी देरी के मामले की जांच एनआईए से करवाने हेतु केंद्र को सिफारिश भेजने की आवश्यकता है, ताकि मामले की सत्यता की पुष्टि हो सके।

अफसरों के गैर जिम्मेदाराना बयान
जहां उपद्रव भड़का वहां, आगजनी की घटनाएं पुलिस ने भी की और पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम में निर्दोष लोगों के वाहनों को जलाया तथा मामले में गलत गिरफ्तारियां दिखाई और जो हालात वार्ता के साथ काबू में आ सकते थे, उन हालातों को गोली चलाकर बिगाड़ा। भागते हुए लोगो पर पुलिस ने गोली चलाई जो पुलिस की कायरता को दर्शाता है।

इसलिए मामले में उदयपुर रेंज के संभागीय आयुक्त व रेंज आईजी, डूंगरपुर जिले के कलेक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक सहित तमाम उन जिम्मेदार अफसरों को एपीओ करना चाहिए, जो मौका स्थिति पर कायर रुख अपनाते हुए पीठ दिखाकर भाग गए।

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सांसद ने कहा कि मामले में कितने लोग मरे, उसपर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और मृतकों के परिजनों को 25 -25 लाख की आर्थिक सहायता व एक-एक सरकारी नौकरी देनी चाहिए। जिन्हें झूठा गिरफ्तार किया गया उन्हें तत्काल रिहाई देने की जरूरत है।

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं, आंदोलनकारी संवैधानिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए करे आंदोलन

सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में हिस्सा का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इसे सामाजिक सौहार्द बिगड़ते हैं। साथ ही आमजन को भी समस्या का सामना करना पड़ता है।

इसलिए मेरी प्रदर्शनकारियों से अपील है कि संवैधानिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्वक अपना आंदोलन करें एवं संविधान की मूल भावनाओं को ही अपना आधार मानते हुए मांग को शासन के समक्ष रखे।

हालात बिगड़े, जिम्मदारी तय हो राजस्थान जैसे शांत प्रदेश में इतने हालात बिगड़ने के बाद सरकार ने रातों-रात हेलीकॉप्टर देकर उच्च पुलिस अधिकारियों को वहां भेजा। अगर यह निर्णय समय पर कर लेते तो शायद प्रदर्शन हिंसक नहीं होता। इस पूरे प्रकरण की हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायायिक जांच भी होनी चाहिए।

राज्य सरकार भी तय करे जिम्मेदारी
सांसद ने कहा कि सरकार, पुलिस तथा प्रशासन के स्तर पर कहां कमी-खामी रही, जिस कारण आंदोलन का रुख एक हिंसात्मक प्रदर्शन की तरफ चला गया और इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए और राज्य सरकार को समय रहते जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

समय रहते बेरोजगारी का स्थाई समाधान नही हुआ तो प्रदेश भर में होंगे आंदोलन
सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदेश की जितनी भी लंबित भर्तियां हैं, उनका अभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से समाधान निकालना चाहिए। साथ ही 4 लाख से अधिक रिक्त पड़े सरकारी महकमों के पदों को भरने की तैयारी सरकार को करने की आवश्यकता है, अन्यथा जो स्थिति आज डूंगरपुर- बांसवाड़ा क्षेत्र में हुई वह प्रदेश के प्रत्येक कोने में हो सकती है।

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इसकी पूरी जिम्मेदारी राजस्थान के वर्तमान सरकार की होगी, क्योंकि सरकार की स्पष्ठ नीतियों के अभाव में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और प्रत्येक भर्ती सरकार की कमी-खामी से न्यायालय में जाकर अटक जाती है।

इसकी वजह से बेरोजगारों में सरकार के प्रति प्रदेश भर में गहरा रोष है और कोरोना काल को देखते हुए आरएलपी पार्टी ने अभी जन आंदोलन नहीं शुरू किया है, मगर सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रही तो जल्द ही बड़े आंदोलन का आगाज प्रदेश में किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग सांसद बेनीवाल ने ट्वीट करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले में संज्ञान लेने की अपील की। सांसद ने कहा कि राज्य सरकार हालातों पर काबू पाने में नाकाम है इसलिए केंद्र से रैपिड एक्शन फोर्स की मांगी है।

राज्य सरकार की आपसी लड़ाई भी है बिगडती क़ानून व्यवस्था का कारण सांसद ने कहा कि प्रदेश में सत्ता पक्ष के नेताओ की आपसी लड़ाई, मुख्यमंत्री द्वारा केवल कुर्सी बचाने पर ही ध्यान देना और जनता के हितों की कोई परवाह नहीं करना भी प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था का प्रमुख कारण है।