आतंकियों को कंधार तक छोड़ने वाले पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह का 82 की उम्र में निधन

जयपुर/बाड़मेर। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह जसोल का आज सुबह 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

24 दिसम्बर 1999 के दौरान आतंकवादियों को कंधार तक छोड़कर आने वाले तत्कालीन विदेश मंत्री की दृढ़ छवि के चलते अटल बिहारी वाजपेई सरकार में सबसे कद्दावर मंत्रियों में से एक रहित जसवंत सिंह पिछले काफी दिनों से कोमा में थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जसोल का आज 82 साल की उम्र में निधन हो गया।

मुस्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख और मौलाना मसूद अजहर को कंधार तक छोड़ने के लिए तब के विदेश मंत्री जसवंत सिंह गए थे। इससे पहले वर्ष 1998 के दौरान जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था, तब भी जसवंत सिंह अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले अटल बिहारी वाजपेई सरकार के पहले मंत्री थे।

इसके अलावा 1999 के दौरान जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा भारत के कारगिल क्षेत्र में हमला किया गया था, तब भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस युद्ध में जसवंत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

साल 2012 के दौरान भाजपा ने उनको उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन कांग्रेस के हामिद अंसारी के सामने को चुनाव हार गए थे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पुस्तक में मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की थी जिसके बाद भाजपा ने उनको बाहर कर दिया था।

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वर्ष 2010 में जसवंत सिंह की भाजपा में वापसी हुई, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उनको पार्टी ने टिकट नहीं देकर यहां से कर्नल सोनाराम को उम्मीदवार बनाया और वह सांसद का चुनाव जीते। इससे नाराज होकर जसवंत सिंह ने फिर से भाजपा छोड़ दी थी।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा, लेकिन भाजपा के उम्मीदवार कर्नल सोनाराम के सामने वह चुनाव हार गए। उसके कुछ ही समय बाद बाथरूम में फिसलने के कारण उनके सिर में चोट लगी और तभी से जसवंत सिंह कोमा में चल रहे थे।