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मंगलवार, अक्टूबर 27, 2020

बेनीवाल हो या पायलट, तीखे तेवर नहीं तो सोशल मीडिया पर “नेताजी” की पूछ नहीं

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रामगोपाल जाट। यदि नेताजी ने अपने तीखे तेवर छोड़ दिये तो उनके प्रशंसक भी किनारा कर लेते हैं। जो नेता जितना ज्यादा तीखापन दिखाता है, उसको उतने ही ज्यादा लोग पसंद करते हैं, फिर चाहे कितने ही बड़े कद का हो, किसी भी दल का हो, किसी भी जाति-धर्म या क्षेत्र का हो।

इस तरह के कई उदाहरण इतिहास में भरे पड़े हैं। पहले जहां नेताजी की रैलियों की भीड़ से उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जाता था, वहीं अब सोशल मीडिया इसका पैमाना बन गया है। राजस्थान की बात की जाए तो यहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के अलावा 3-4 अन्य नेता हैं, जो बड़े पैमाने पर प्रशंसक रखते हैं और उनको प्रभावित करते हैं।

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प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के डिप़्टी सीएम रहे सचिन पायलट का इन दिनों युवाओं में खासा क्रेज दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों अशोक गहलोत और पायलट के बीच सियासी लड़ाई के समय सचिन पायलट के समर्थकों ने उनको जमकर समर्थन दिया है। माना जाता है कि कांग्रेस में सचिन पायलट को युवा वर्ग में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।

पार्टी में भले ही आज अशोक गहलोत का होल्ड हो, किन्तु पायलट को यूथ आईकॉन के तौर पर देखा जाता है। पिछले दिनों की गहलोत-पायलट जंग निपटने के बाद अब फिर से इन दिनों सोशल मीडिया पर उनकी फ़ोटो और पोस्ट को लाइक, शेयर करने वाले समर्थकों की संख्या कम होने लगी है।

बावजूद इसके सचिन पायलट अब भी सोशल मीडिया पर राज्य के टॉप नेताओं में शुमार हैं। अगस्त-सितंबर में 19 विधायकों के साथ पार्टी से बगावत करने के दौरान सोशल मीडिया पर पायलट को जो बड़ा समर्थन मिला था, वो समर्थन सचिन पायलट को अब नहीं मिल रहा है। बगावत करने और हरियाणा के मानेसर में कैंप करने के दौरान उनके सपोर्टर्स की संख्या में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी हुई थी।

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समर्थकों को खूब पंसद आए थे पायलट के तेवर
पायल़ट को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किये जाने के बाद उनकी ओर से दिखाए गए तीखे तेवर समर्थक युवाओं को खूब पसंद आए थे। देशभर में सोशल मीडिया पर पायलट को जबरदस्त समर्थन मिला था। इसके बाद 10 अगस्त को गहलोत-पायलट में सुलह होने और राज्य में उनकी वापसी के बाद पायलट के तेवर नरम पड़े तो ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर उनकी फ़ोटो, पोस्ट को लाइक- शेयर करने वालों की तादात में भी कमी आई। तब जहां लाइक करने वाले लाखों में थी, वही संख्या अब हज़ारों में रह गई है।


जिस दिन पायलट वापस लौटे, इसी दिन उन्होंने समर्थन करने वाले लोगों के लिए धन्यवाद देती पोस्ट भी लिखी थी। जिसको 2 लाख 43 हजार लाइक, 21 हजार से ज्यादा कमेंट्स और 30 हजार से ज्यादा रिट्वीट किया गया था। यह उनकी सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता थी।

लाखों का आंकड़ा 5 से 10 हजार पर आ टिका
जैसे ही सचिन पायलट के तेवर ढीले पड़े हैं, वैसे ही उनके समर्थक भी निराश हो गए हैं। पायलट द्वारा ट्वीटर पर होने वाली पोस्ट में लाइक करने वालों की तादात अब 8 से 10 हजार तक सीमित हो गई है। पिछले दो दिन, 21-22 सितंबर को पायलट ने डेढ़ दर्जन से ज्यादा ट्वीट किए, किन्तु उनको लाइक करने वालों का आंकड़ा 5 से 10 हजार के बीच है। इससे चार दिन पहले बेरोगारी को लेकर सचिन पायलट के ट्वीट को 36 हजार से ज्यादा लाइक मिले और 8 हजार से ज्यादा समर्थकों ने उसको रिट्वीट किया।

मिले थे 3 लाख से ज्यादा लाइक, मामला बड़ा था
टोंक विधायक पायलट पर सरकार गिराने की साजिशों में शामिल होने के आरोपों के बाद उन्हें 14 जुलाई 2020 को उप मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ के पदों से बर्खास्त किया गया था। तब पायलट ने ट्विटर अकाउंट पर ‘सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं’ वाली पोस्ट की थी, जिसे 318000 लाइक , 36000 से ज्यादा कमेंट्स और 54000 से ज्यादा रिट्वीट किया गया।

बेनीवाल के समर्थक हुए ठंडे

केवल पायलट ही नहीं, बल्कि राजस्थान के फायर ब्रांड नेता और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल के समर्थक भी इन दिनों ठंडे ही नजर आ रहे हैं। साल 2013 से 2018 तक वसुंधरा राजे सिंधिया की तत्कालीन सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले बेनीवाल के समर्थकों में खास इजाफा हुआ था।

कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि उस दौर में सोशल मीडिया पर राज्य में हनुमान बेनीवाल ही सबसे बड़े नेता थे। जबकि उन्होंने जयपुर, सीकर, नागौर, बाड़मेर और जोधपुर में लाखों की रैलियां कर राजे सरकार की नाक में दम कर दिया था।

हालांकि, अपनी पार्टी के गठन और उसके बाद 3 विधायक जिताने के बाद ऐसा लग रहा था कि बेनीवाल भाजपा-कांग्रेस के खिलाफ लोकसभा चुनाव में जाएंगे, किन्तु उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन कर खुद नागौर से सांसद बनने और करीब 10 अन्य सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जिताने में महती भूमिका निभाई।

लोकसभा चुनाव के बाद हनुमान बेनीवाल दिल्ली चले गए हो। राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार के खिलाफ उन्होंने खुलकर मैदान में उतरना छोड़ दिया। करीब 6 महीने बाद ही राजस्थान समेत पूरे देश में कोरोना के चलते लॉकडाउन शुरू हो गया। इसके बाद तकरीबन सभी नेता फील्ड में उतरने के बजाय ऑनलाइन ट्वीट फेसबुक पोस्ट और मीडिया के द्वारा ही बयान जारी करने लगे।

इसी का नतीजा है कि करीब 1 साल से हनुमान बेनीवाल के समर्थक भी सोशल मीडिया पर इतने एक्टिव नहीं हैं, जितने 2013 से लेकर 2018 के दौरान थे। उस दौरान हनुमान बेनीवाल के नाम से फेसबुक पर कई ग्रुप से बनाए गए, जिनपर उनके वीडियो और खबरें भी खूब वायरल होती थीं, किंतु अब इसकी गति धीमी पड़ गई है।

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बेनीवाल हो या पायलट, तीखे तेवर नहीं तो सोशल मीडिया पर "नेताजी" की पूछ नहीं 3
Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिआ संपादक .

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