हनुमान बेनीवाल ने स्थानीय लोगों को नौकरी देने के लिए संसद में उठाई यह मांग

-आरोप-प्रत्यारोप से उपर उठकर मजदूर हितों पर हो सामूहिक चिंतन, 80 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोज़गार देने का बनाया जाए प्रावधान – हनुमान
Delhi/ Jaipur

स्थानीय लोगों को रोजगार में वरीयता देने की मांग अब धीरे-धीरे संसद में भी उठने लगी है। संसद में हनुमान बेनीवाल के द्वारा स्थानीय उद्योग धंधों में स्थानीय लोगों को वरीयता देने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है।

लोकसभा में मंगलवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सांसद हनुमान बेनीवाल ने श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय से जुड़े पेश किए गये तीन बिलों की सामूहिक चर्चा मे भाग लिया। उन्होंने कहा कि मजदूरों के संरक्षण पर अपनी बात रखते हुए मजदूरों के न्यूनतम वेतन और उनकी सामाजिक सुरक्षा करने हेतु ठोस उपाय करने की माँग की।

बेनीवाल ने कहा की एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है, और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है।

मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना ही एक स्थान है।

सांसद ने कहा कि व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता,2020, औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2020 व सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की चर्चा पर बोलते हुए कहा कि 10 और उससे अधिक श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स तथा खानों एवं डॉक्स पर कार्यरत कर्मचारियों की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी स्थितियों को रेगुलेट करने, श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा संबंधी सुविधा और आय सुरक्षा के प्रावधान को सुनिश्चित करने सहित कई गैर ज़रूरी क़ानूनों को ख़त्म करते हुए नये प्रावधान जोड़ने करने, कई गैर ज़रूरी क़ानूनों को ख़त्म करते हुए नये प्रावधान जोड़ने से मजदूर हितों का संरक्षण बढ़ेगा।

यह भी पढ़ें :  JNU हिंसा में पुलिस कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश, जॉइंट कमिश्नर करेंगे जांच

साथ ही सांसद ने कहा की 300 से कम कर्मचारियों की संख्या वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मियों की जब चाहे छंटनी कर सकेगी, मगर सरकार को ठोस प्रावधान बनाने होंगे, ताकि कंपनी बिना किसी ठोस के कारण अचानक किसी कर्मचारी की छंटनी नहीं कर दे।

इस मुद्दे पर किया सरकार का ध्यान आकर्षित

सांसद ने विधेयकों पर बोलते हुए कहा की राजस्थान सहित देश के भारी उद्योगों में काम कर रहे मजदूरों को न्यूनतम वेतन को लेकर प्रावधान होने के बावजूद वेतन को लेकर शिकायतें आती हैं, कि संबन्धित कंपनी मजदूरों को पूरा वेतन देने मे आनाकानी करती है।

इसलिए देश के विभिन्न राज्यों में स्थित केंद्रीय श्रम विभाग के कार्यालायों को निर्देशित किया जाए, कि उनके क्षेत्राधिकार में जो भी उद्योग हैं, उनमें मजदूरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अभियान चलाया जाए।

सांसद ने सदन में एक रिपोर्ट के हवाले से कहा की भारतीय अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र के लगभग 45 करोड़ श्रमबल में से करीब 30 प्रतिशत श्रमिक प्रवासी मजदूर हैं, जो गांवों, छोटे शहरों एवं पिछड़े इलाकों से रोजगार की तलाश में बड़े शहरों, औद्योगिक, कृषि एवं व्यावसायिक रूप से विकसित क्षेत्रों में जाते हैं।

साथ ही नीति आयोग के अनुसार असंगठित क्षेत्र देश के 85 प्रतिशत मजदूरों को रोजगार देता है। जबकि वर्ष 2018-19 के आर्थिक सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं। देश की सकल आय में इस क्षेत्र का योगदान 49 प्रतिशत के करीब है।

इसलिए स्थानीय लोगों को 80 प्रतिशत रोजगार में प्राथमिकता कैसे मिले, उस पर सदन को गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है।

यह भी पढ़ें :  CM अशोक गहलोत PCC चीफ सचिन पायलट की लड़ाई का नतीजा है ACB की कार्रवाई? मंत्री खाचरियावास ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

उन्होने राजस्थान के बाड़मेर जिले मे तेल, गैस कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा की तेल गैस आदि क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनियां उस गाँव के लोगों को रोज़गार देने मे आनाकानी करती हैं। जिस गाँव की ज़मीन से तेल निकलकर राज्य व देश को बड़ी राशि मे रॉयल्टी प्राप्त होती है। इसलिए सरकार को इस और ध्यान देने की ज़रूरत है।

कोरोना वॉरियर्स की मेहनत के कारण भारत मे रिकवरी रेट अन्य देशों की तुलना मे बेहतर- हनुमान बेनीवा

सोमवार देर रात लोकसभा मे पारित हुए महामारी संशोधन विधेयक-2020 की चर्चा मे भाग लेते हुए बेनीवाल ने कहा की इस विधेयक से मेडिकल स्टाफ व चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही उनके साथ किसी प्रकार दुर्व्यवहार होने पर त्वरित न्याय मिल सकेगा।

सांसद ने कहा की अप्रेल माह में अध्यादेश के रूप मे लाकर केंद्र सरकार ने कोरोना वॉरियर्स की सुरक्षा सुनिश्चित की है।

उन्होने कहा की अन्य देशों की तुलना में भारत में मेडिकल स्टाफ के प्रयायों से कोरोना से प्रभावित मरीजों की मृत्यु दर कम है। उम्मीद है जल्द ही कोरोना को समाप्त करने की दशा मे पूरे विश्व को मार्गदर्शन देगा।