सचिन पायलट को फंसाने चले थे, अशोक गहलोत खुद आये लपेटे में

भोपाल/जयपुर। मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा घनिष्ठ मित्रों सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को आपस में लड़ाने का प्रोग्राम बनाया था।

अशोक गहलोत के राय देने के बाद कमलनाथ के द्वारा कांग्रेस आलाकमान से चंबल रीजन की 16 विधानसभा सीटों के लिए सचिन पायलट को स्टार प्रचारक बनाने के लिए मांग की गई थी, जिस पर कांग्रेसी आलाकमान ने सहमति दे दी है। सचिन पायलट ने भी वहां पर प्रचार करने के लिए अनुमति दे दी है।

चंबल रीजन कि इन 16 विधानसभा सीटों में से 9 विधानसभा सीटों पर गुर्जर समाज के वोटर्स का बाहुल्य है और यह सभी सीटें राजस्थान की सीमा से सटी हुई हैं। इसके चलते कमलनाथ चाहते हैं कि सचिन पायलट के रूप में यहां वोटर्स को रिझाने का काम किया जा सके।

माना जा रहा है कि सचिन पायलट के द्वारा यहां पर चुनाव प्रचार के लिए सहमति देने के बाद कमलनाथ जहां कुछ राहत महसूस कर रहे हैं, तो पायलट की इस सहमति के कारण कांग्रेस आलाकमान के नजर में उनका कद भी बढ़ गया है।

राजनीतिक साजिश के तहत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चाहते थे कि सचिन पायलट के ताबड़तोड़ हमलों से कुछ समय के लिए बचा जा सके। इसको देखते हुए उन्होंने कमलनाथ को मध्यप्रदेश में व्यस्त करने की सलाह दी थी, लेकिन अशोक गहलोत का यह दांव अब उन पर खुद पर ही भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है।

माना जा रहा है कि इन सभी 9 सीटों पर सचिन पायलट के प्रचार करने के कारण कांग्रेस को फायदा मिलेगा और यदि ऐसा होता है तो सचिन पायलट का कद बढ़ेगा, जिसका आने वाले समय में अशोक गहलोत को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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सचिन पायलट के साथ आज की तारीख में कांग्रेस के 40 से 45 विधायक माने जाते हैं और ऐसी स्थिति में यदि पायलट के प्रचार करने के कारण कांग्रेस को चंबल रीजन की 9 गुर्जर बाहुल्य सीटों पर फायदा मिलता है तो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में अशोक गहलोत की सरकार के संचालन में दिक्कतें हो सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और टोंक से विधायक सचिन पायलट के बीच कांग्रेस आलाकमान के दखल के बाद राजनीतिक सुलह हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच में जो दरार पैदा हुई है, वह कम नहीं हुई है।

सचिन पायलट खेमे के विधायक लगातार जनता की समस्याओं को लेकर और शिकायतों को लेकर अशोक गहलोत को पत्र लिखते रहते हैं। इसके साथ ही अपने पत्र की एक प्रति कांग्रेस आलाकमान को भी भेजते हैं। साथ ही एक प्रति आलाकमान के द्वारा बनाई गई तीन सदस्य समन्वय समिति को भी भेजने का काम किया जा रहा है।

पूरी प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रहा है सचिन पायलट का कैंप अभी धीरे-धीरे अशोक गहलोत सरकार को चारों ओर से दबाव बनाने का काम कर रहा है। एक तरफ जहां पत्र अशोक गहलोत को भेजा जा रहा है तो दूसरी तरफ कांग्रेस आलाकमान और समन्वय समिति को भी भेजने के कारण पूरे सबूत अशोक गहलोत सरकार के नक्कारापन के जुटाए जा रहे हैं।

बहरहाल सचिन पायलट मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। अपने पुराने मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनका समन्वय सर्वविदित है। ऐसे में दोनों मित्रों के बीच टकराव होने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन चुनाव का परिणाम दोनों नेताओं के भविष्य पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव को दिखाने का काम जरूर करेगा।

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