पायलट-सिंधिया आमने-सामने, क्या यह गहलोत-कमलनाथ का खेल है?

जयपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। यहां पर होने वाले इस उपचुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान से सचिन पायलट को स्टार प्रचारक बनाया है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट को अशोक गहलोत के द्वारा राय देने पर कमलनाथ में कांग्रेस आलाकमान से मांग कर के स्टार प्रचारक बनाने का काम किया गया है।

इन 28 सीटों पर मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की इज्जत दांव पर लगी है। जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा पार्टी बदलने के कारण तत्कालीन कांग्रेस की कमलनाथ वाली सरकार गिरी थी और उनके पाला बदलकर भाजपा में शामिल होने से शिवराज सिंह सरकार बनने में कामयाब हुई।

इसके चलते एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया अपना राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए प्रयास में जुटे हुए हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से अशोक गहलोत और कमलनाथ के द्वारा जाल में फंसा कर सचिन पायलट को उनके सामने खड़ा कर दिया है।

गौरतलब है कि सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया घनिष्ठ मित्र दोनों पहले कांग्रेस के नेता हुआ करते थे, लेकिन मार्च के महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। अभी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के टिकट पर राज्यसभा सांसद हैं।

एक तरफ जहां कांग्रेस के नेता के तौर पर सचिन पायलट स्टार प्रचारक बनाने के कारण मध्य प्रदेश के इस उपचुनाव में उनकी इज्जत दांव पर लगी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी यहां पर प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

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बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के चंबल रीजन की 16 विधानसभा सीटों में से 9 सीटें ऐसी हैं, जो राजस्थान की सीमा से लगती है और यहां पर गुर्जर समाज के वोटर का बाहुल्य होने के कारण कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट के रूप में फायदा लेने का प्रयास कर रही है।

अगर यहां पर सचिन पायलट का प्रभाव चला और कांग्रेस जीतने में कामयाब रही तो उनके मित्र, यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगेगा और अगर कांग्रेस यहां पर चुनाव हार गई तो सचिन के रूप में स्टार प्रचारक बनाकर भेजे पायलट की भी प्रतिष्ठा कांग्रेस पार्टी में चोटिल होगी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो दोनों ही तरह से अशोक गहलोत और कमलनाथ को फायदा होने वाला है। इसके साथ ही दो घनिष्ठ मित्रों के बीच में दरार पैदा करने के लिए भी अशोक गहलोत और कमलनाथ के द्वारा यह पूरा प्लान किया गया है।