कोरोना रोगियों के साथ OPD कर लोगों की जान से खेल रहा ESIC हॉस्पिटल

रामगोपाल जाट। कोरोनावायरस (COVID-19) राजस्थान में तेजी से अपने पांव पसारता जा रहा है राज्य की सरकार वैसे तो तमाम तरह की सुविधाएं मरीजों के लिए मुहैया करवाने का दावा कर रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि चिकित्सा विभाग (Medical Department) में बैठे जिम्मेदार लोग ही कोरोनावायरस को फैलाने का काम कर रहे हैं।

राज्य सरकार के द्वारा राजस्थान स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के अस्पताल के अलावा जयपुरिया हॉस्पिटल (Jaipuria Hospital) और ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) हॉस्पिटल को भी कोविड कैट सेंटर बनाने का दावा किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ईएसआईसी हॉस्पिटल के भीतर आईपीडी की सुविधा नहीं होने के कारण यहां के जिम्मेदार ओपीडी करके आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

मजेदार बात यह है कि ईएसआईसी हॉस्पिटल (ESIC Hospital) को भले ही सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत लाकर यहां पर कोरोना का डेडीकेट सेंटर बनाने का सरकार ने दावा किया हो, किंतु इस बारे में एसएमएस मेडिकल कॉलेज (SMS Medical Collage) के प्रिंसिपल डॉ सुधीर भंडारी का कहना है कि जो भी सुविधाएं करनी हैं, वह सब ईएसआईसी हॉस्पिटल के डायरेक्टर को करनी हैं, वो ही अपनी सुविधानुसार मरीजों को देखने और ओपीडी की व्यवस्था करने का काम कर रहे हैं।

इधर ईएसआईसी (ESIC HOSPITAL) हॉस्पिटल के अंदर अभी तक भी आईपीडी (OPD) की सुविधा नहीं है इसके चलते अस्पताल में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है, बल्कि केवल ओपीडी की जा रही है।

जिसमें जांच के सैंपल लेने की सुविधा है, किंतु जब कोई व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है तो उसको यहां से रेफर किया जाता है। एक और खास बात यह है कि यहां के डॉक्टर अधिकांश मरीजों को अपने चहेते निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं और कमीशन का खेल खेल रहे हैं।

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सरकार की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है, किंतु इस मामले को लेकर ना तो चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के द्वारा कोई कदम उठाने की हिमाकत की गई है और ना ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज (SMS MEDICAL COLLAGE HOSPITAL) की प्रिंसिपल डॉ सुधीर भंडारी के द्वारा किसी तरह की जहमत उठाई गई है।

राजस्थान स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के अस्पताल जो कि प्रताप नगर में स्थित है, वहां पर कोरोनावायरस के पॉजिटिव मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण और मरीजों को भर्ती करने की सुविधा नहीं है। ऐसे में सरकार ने जयपुरिया अस्पताल का कोविड डेडिकेटेड सेंटर बनाया है।

इसी तरह से जयपुर में ईएसआईसी हॉस्पिटल को भी कोविड-19 समर्पित करते हुए सरकार ने अधिग्रहण किया है और यहां पर भी कोरोनावायरस के मरीजों का इलाज करने का दावा किया गया है, किंतु वास्तविकता यह है कि यहां पर कोरोनावायरस के मरीजों की जांच की जा रही है तो सामान्य ओपीडी भी चल रही है, जिसके कारण आम लोगों में भी कोरोनावायरस फैलाने का काम खुद सरकारी तंत्र कर रहा है।

जानकारी में आया है कि यहां के डॉक्टर और स्टाफ के द्वारा आईपीडी की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाने के लिए अस्पताल के निदेशक के ऊपर दबाव बनाया गया है, ताकि उनको कोरोनावायरस के मरीजों का उपचार नहीं करना पड़े और ओपीडी की सुविधा चलने के कारण रेफरल का लाभ भी मिलता रहे।

उल्लेखनीय है कि ईएसआई हॉस्पिटल के पास बड़ा भवन है। इसके साथ ही यहां पर सुविधाएं भी संपूर्ण है, किंतु इसके बावजूद भी अस्पताल के जिम्मेदारों के द्वारा अभी तक यहां पर आईपीडी की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है, जो खुद ही सवालों के घेरे में हैं।

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एक तरफ जहां पर राजस्थान स्वास्थ्य विश्वविद्यालय (RUHS) का अस्पताल कोरोनावायरस के मरीजों से भरा हुआ है, तो दूसरी तरफ जयपुरिया हॉस्पिटल में भी अब बेड कम पड़ने लगे हैं। ऐसे में लोग मजबूरीवस प्राइवेट हॉस्पिटलों में जाकर लुटने को मजबूर हैं, किन्तु सरकारी तंत्र यह सब देखने के बावजूद नाकारा साबित हो रहा है।