बेरोजगारों के लिए खुशखबरी: राजस्थान में टाइम फ्रेम भर्ती की तैयारी में सरकार

जयपुर। UPSC के द्वारा अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की तरह राजस्थान में भी राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से नियमित और टाइम फ्रेम सरकारी भर्तियां करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर उच्च स्तरीय बैठक ली। उस बैठक के बाद में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी भर्तियों के रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर किया जाए और समय पर भर्तियां की जाए।

टाइम फ्रेम भर्तियों को लेकर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के संयोजक उपेन यादव लंबे समय से संघर्ष करते रहे हैं, उनका कहना है कि अगर सरकार सभी सरकारी भर्तियों को एक निश्चित टाइम पर करें और भर्तियों को अटकाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तो प्रदेश में बेरोजगारों की स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।

इसके साथ ही उपेन यादव ने यह भी कहा है कि सरकार यदि सरकारी भर्तियां, जोकि कोर्ट में अटकी हुई हैं, उनके लिए मजबूत पैरवी करें और नई भर्तियां निकालने से पहले इस तरह का प्रावधान करें कि किसी भी सूरत में भर्ती कोर्ट में अटके नहीं तो बेरोजगारों के लिए इस सरकार की यह सबसे बड़ी सौगात होगी।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में करीब 4000 सरकारी भर्तियां विभिन्न न्यायालयों में प्रक्रियाधीन है और इनको लेकर सरकार की तरफ से समय-समय पर पैरवी करने का काम किया जाता है, किंतु अभी भी अटकी होने के कारण लाखों बेरोजगारों का भविष्य खराब हो रहा है।

गहलोत ने कहा है कि किसी भी विभाग द्वारा भर्ती की अभ्यर्थना भेजे जाने के बाद परीक्षा आयोजित होने एवं परिणाम जारी होने में ज्यादा समय नहीं लगे इसके लिए विभाग आरपीएससी एवं राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित करे।

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संघ लोक सेवा आयोग की तरह ही समय पर भर्ती विज्ञापन निकलें, नियमित परीक्षा हो और साक्षात्कार भी समय पर हों ताकि भर्तियां ज्यादा लंबित नहीं रहें।

निवास पर विभिन्न विभागों की प्रक्रियाधीन भर्तियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) एवं राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं, राज्य सेवाओं एवं अधीनस्थ सेवाओं की भर्ती कैलेण्डर केअनुरूप समयबद्ध रूप से पूरी करे।

जहां तक संभव हो भर्ती का विज्ञापन निकालने से पहले ही संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि उस परीक्षा की तिथि पर कोई अन्य परीक्षा पहले से ही निर्धारित न हो जिससे परीक्षा स्थगित करने की नौबत न आए। यह प्रयास हो कि एक बार भर्ती विज्ञापन निकालने के बाद उसमें बार-बार संशोधन न करना पड़े।

सेवा नियमों की अड़चनों के कारण कई बार भर्तियां अटकती हैं। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर सेवा नियमों में संशोधन किया जाए।

और संबंधित विभाग राज्य के महाधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर न्यायालयों में अपना पक्ष मजबूती से रखें। भर्तियों के कोर्ट में अटकने के कारण कई बार अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

न्यायिक निर्णयों के कारण लंबित भर्तियों के संदर्भ में पिछले चार माह में हुई प्रगति एवं करीब 6 हजार भर्तियों पर स्थगन आदेश हटना एवं भर्तियां पूरी होना संतोषजनक है। शेष जो भर्तियां न्यायिक प्रक्रिया के कारण लंबित हैं उनमें प्रभावी रूप से पैरवी की जाए।

दस्तावेज सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार अवसर देने के बजाए कट-ऑफ डेट एक बार ही तय कर दी जाए। चयनित अभ्यर्थियों का परिवीक्षा काल पूरा करने के बाद स्थायीकरण समय पर हो यह सुनिश्चित किया जाए।
रीट की परीक्षा भी समय पर आयोजित कराने के निर्देश दिए।

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चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन का कार्य तय समय में हो। आरपीएससी एवं अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड विज्ञापन के माध्यम से अभ्यर्थियों को इस संबंध में सूचना दें एवं इसके लिए एक समयावधि तय कर दी जाए।