कोरोना जांच के दाम 1200 रूपए, निजी अस्पताल वसूल रहे 2200 रूपए

जयपुर
प्रदेश में भले ही सरकार ने कोरोना संक्रमितों को राहत देते हुए निजी अस्पतालों में कोविड 19 की जांच दरों में एक हजार रुपए की कमी की घोषणा कर दी हो।

लेकिन अब तक निजी चिकित्सालय लोगों से जांच के 2200 रुपए ही वसूल रहे हैं। जबकि सरकार ने गत 15 सितम्बर को ही आदेश जारी कर जांच की दर 1200 रुपए निर्धारित की थी।


बता दें कि प्रदेश के निजी चिकित्सालयों में गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों का इलाज शुरू होने से पहले कोविड जांच की जा रही है। इसका नतीजा आने के बाद ही इलाज शुरू किया जा रहा है।

इसके चलते अब विभिन्न बीमारियों के मरीजों को अस्पतालों के धक्के खाने पड रहे हैं। वहीं कोरोना जांच आवश्यक होने की बात कहकर निजी अस्पताल मरीजों से जांच के नाम पर 2200 रुपए वसूल रहे हैं।


केस वन
परकोटा निवासी गुंजन वशिष्ठï के पिता को पैरालाइसिस अटैक आने पर संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल लाया गया जहां कोविड टैस्ट के 2200 रुपए वसूले गए।

वहीं इलाज के लिए भी पूरा पैसा जमा कराने के बाद भी उनका इलाज नहीं किया गया और एसएमएस अस्पताल रैफर कर दिया गया। साथ ही उनकी दवा पर्ची पर कोविड संदिग्ध लिख दिया गया जिसके कारण मरीज को आरयूएचएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

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केस 2
सुखवीर की तबीयत बिगडने पर इलाज के लिए उसे जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी लेकर जाया गया जहां चिकित्सकों ने पहले कोविड टैस्ट करने के लिए कहा और यहां भी कोविड टैस्ट के 2200 रुपए वसूले गए।

जब अस्पताल प्रशासन से कोविड जांच की दर कम करने की बात की गई तो उन्होंने आदेश नहीं होने का हवाला देते हुए पूरे पैसे जमा कराने के लिए कहा।

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निजी में पॉजिटिव, वहीं सरकारी में नेगेटिव
राजधानी में निजी और सरकारी अस्पतालों की कोविड जांच रिपोर्ट में गडबडी आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसका ताजा नमूना भी शुक्रवार को सामने आया है।

यहां मरीज रमेश चंद शर्मा की दुर्लभजी अस्पताल में कोविड जांच करवाई गई तो उसकी जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव बताया गया।

वहीं यहां से रैफर होने के बाद जब आरयूएचएस अस्पताल में दुबारा जांच करवाई गई तो जांच रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है। जांच रिपोर्ट में गडबडी के चलते अब मरीजों के सामने संकट है कि वे किस रिपोर्ट को सही माने।

इनका कहना है-
निजी अस्पतालों की ओर से कोविड जांच के 2200 रुपए मिलने की शिकायत मिली है। इसके लिए सभी को स्पष्ट चेतावनी दी गई है और अब किसी भी अस्पताल में जांच के नाम पर ज्यादा वसूली की गई तो विभाग की ओर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. नरोत्तम शर्मा, सीएमएचओ प्रथम जयपुर।