जल मिशन के तहत राजस्थान को 90:10 में मिले सहायता: डॉ. किरोड़ीलाल

-संसद के विशेष उल्लेख समय में राज्यसभा में डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने जल जीवन मिशन के तहत राजस्थान को 50:50 के स्थान पर 90:10 के अनुपात में केंद्रीय सहायता की माँग संसद में उठाई।

जल जीवन मिशन के प्रावधानों के अंतर्गत राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ आदि के लिए 50 :50 के अनुपात में केंद्रीय व राज्यांश का प्रावधान रखा गया है।

राजस्थान की तुलना इन राज्यों से किया जाना उचित नहीं है क्योंकि राजस्थान में जल उपलब्धता बहुत कम है। भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है यहां कुल वर्षा का मात्र 1% पानी गिरता है।

इसके साथ ही राजस्थान के दो सौ ब्लॉक्स यानी 85% भाग डार्क जोन में है एवं गुणवत्ता के परिप्रेक्ष्य में भी देश के लगभग एक तिहाई गुणवत्ता प्रभावित ग्राम / ढाणियाँ राजस्थान में स्थित हैं।

राज्य के गांव / ढाणियँ खासतौर मरुस्थलीय एवं आदिवासी इलाकों में छितरे रूप में दूर-दूर बसे हुए हैं, इस कारण पेयजल योजनाओं की लागत अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक आती है।

पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में जहां पानी की विकट समस्या है उनको 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के अनुसार पेयजल उपलब्ध कराने हेतु नदियों को जोड़ने की योजना हाथ में लेनी पड़ेगी।

जिससे पेयजल की लागत बहुत ज्यादा आएगी 2013 तक राजस्थान NRDWP राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत राजस्थान हेतु 90:10 के अनुपात से ही केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती थी।

तत्पश्चात् इसे घटाकर 60 :40 एवं बाद में 50:50 कर दिया गया था। मेरी मांग है कि भारत सरकार राजस्थान राज्य को जल जीवन मिशन के अंतर्गत 50 :50 के स्थान पर 90 :10 के अनुपात में केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराएं जिससे लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा सके

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