कांग्रेस विधायक ने इस मंत्री को बर्खास्त करने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत को लिखा पत्र

जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के रूप में 2 धड़ों में बंटी हुई कांग्रेस पार्टी के कोटा जिले के सांगोद से विधायक ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है।

सांगोद विधानसभा क्षेत्र के विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा है कि आपके द्वारा जिलों के प्रभारी मंत्री बदले गए हैं, उम्मीद करते हैं कि इसके बाद समस्याओं का समाधान होगा लेकिन अच्छा होता है, इसके साथ ही आप अपने खास और सबसे भ्रष्ट कैबिनेट मंत्री को भी बर्खास्त कर देते।

माना जा रहा है कि भरत सिंह कुंदनपुर के द्वारा कोटा से आने वाले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और उसी संभाग के प्रमोद जैन भाया में से किसी एक को लेकर यह पत्र लिखा गया है। हालांकि उन्होंने पत्र में किसी का नाम नहीं लिखा है।

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उल्लेखनीय है कि भरत सिंह कुंदनपुर और कोटा के विधायक वर्तमान यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के अलावा प्रमोद जैन भाया के बीच लंबी तनातनी चलती रही है। गाहे-बगाहे उन्होंने मंत्री शांति धारीवाल पर भ्रष्टाचार के पहले भी खूब आरोप लगाए हैं।

गौरतलब है कि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के ऊपर 2008 से 2013 के कार्यकाल में भी आरोप लगे थे और इस बार भी भ्रष्टाचार के जबरदस्त आरोप लगाए जा रहे हैं। दोनों ही मंत्रियों से पिछले कार्यकाल में मंत्री का प्रभार छीना गया था।

इस पत्र के वायरल होने के बाद भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने लिखा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ध्यान दें, यह पत्र भाजपा के कहने पर नहीं लिखा गया है और इससे साबित होता है कि कांग्रेस की सरकार में भ्रष्टाचार कितने बड़े पैमाने पर चल रहा है।

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भरत सिंह कुंदनपुर के द्वारा लिखे गए इस पत्र के वायरल होने के बाद कांग्रेस की राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में हड़कंप मच गया। इसके पत्र को लेकर वास्तविकता जानने के लिए लोगों में उत्सुकता बनी रही। आखिरकार कुंदनपुर ने स्वीकार किया कि यह पत्थर उन्होंने ही लिखा है।

आपको यह भी बता दें कि पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक जंग चली थी, तब भरत सिंह कुंदनपुर भी सचिन पायलट के कैंप में थे।

यहां पर यह भी बताना उचित होगा कि धीरे-धीरे सचिन पायलट कैंप के विधायकों के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर काम करने का दबाव बनाया जा रहा है तो गहलोत के खास मंत्रियों को टारगेट करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।