अब नहीं बचेगी कांग्रेस की सरकार, पायलट-गहलोत के बीच फिर सुलगी आग

जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार जुलाई और अगस्त के महीने में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद टूटने की नौबत आ गई थी, लेकिन बाद में कांग्रेस आलाकमान के द्वारा समझौता कराए जाने के बाद अस्थाई तौर पर सरकार बच गई।

करीब एक महीने बाद एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर आज आ गई है। मामला इतना पेचीदा हो गया है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक आग सुलग उठी है।

कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अजय माकन के द्वारा संभाग स्तर पर सचिन पायलट समेत उनके साथी विधायकों की शिकायतों और कांग्रेस के नाराज कार्यकर्ताओं की परिवेदना एकत्रित करने का काम किया जा रहा था। लेकिन अजमेर में कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के दो खेमों के बीच लड़ाई एक बार फिर खुलकर सामने आ गई।

अजमेर संभाग में कांग्रेस के खेमेबाजी से नाराज होकर अजय माकन ने प्रदेश के अन्य संभागों में फीडबैक बैठ के लेने से इनकार कर दिया है। जिस तरह से अशोक गहलोत ने खुद को 1 महीने तक मुख्यमंत्री निवास में क्वारंटाइन कर लिया है, उससे साबित होता है कि दोनों नेताओं के बीच एक बार फिर से सियासी संग्राम शुरू हो चुका है।

दूसरी तरफ सचिन पायलट के द्वारा 7 सितंबर को अपने जन्म दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में खुद के समर्थक विधायकों और कार्यकर्ताओं के द्वारा शक्ति प्रदर्शन करने का काम किया गया है, जो अशोक गहलोत सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण बनता नजर आ रहा है।

सचिन पायलट चाहते हैं कि जल्द से जल्द राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का कार्य किया जाए और राजनीतिक नियुक्तियां का काम भी किया जाना चाहिए, लेकिन अशोक गहलोत लगातार इससे बचने की जुगत बैठा रहे हैं।

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कांग्रेस आलाकमान के द्वारा अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच समन्वय बनाने के लिए तीन सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया था, उसके द्वारा अभी तक सचिन पायलट और नाराज विधायकों से शिकायतें सुनने का काम भी नहीं किया गया है।

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अगर दीपावली तक सचिन पायलट के द्वारा बताई गई शिकायतों का निवारण नहीं किया गया और उनके खेमे के विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई तो इस साल के अंत तक सचिन पायलट अशोक गहलोत की सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं।

राजस्थान में जिस तरह से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रूप में कांग्रेस के मुंह में नजर आ रही है, उसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिल रहा है, लेकिन भाजपा सूत्रों का दावा है कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अप्रत्यक्ष रूप से अशोक गहलोत सरकार को बचाने का काम नहीं कर रही हैं।