समय पर खाना नहीं दिया, भूख से हो गई कोरोना के मरीज की मौत, मंत्री साले मोहम्मद के प्रभार जिले का मामला

बीकानेर। राजस्थान सरकार के द्वारा कोरोनावायरस के मरीजों के लिए अस्पतालों में उपचार रहने की सुविधा खाने के संसाधन समेत तमाम तरह के उपाय किए जाने का खूब दावा किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य में मरीज कोरोनावायरस समेत सरकारी लापरवाही के चलते अपनी जान गवा रहे हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री साले मोहम्मद के प्रभार वाले बीकानेर जिले के पीबीएम अस्पताल में कोविड सेंटर में उपचार के दौरान स्टाफ की भारी लापरवाही के चलते दिनकर गोस्वामी की भूख के कारण मौत हो गई।

मृतक दिनकर गोस्वामी के परिजन कार्तिकेय गोस्वामी ने साले मोहम्मद को पत्र लिखकर पीबीएम अस्पताल में व्याप्त भारी अनियमितताओं और संसाधनों की कमी की ओर इंगित करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार और प्रशासन कोरोनावायरस से संक्रमित होने वाले तथा कोरोना महामारी से मरने वाले व्यक्तियों को आंकड़े के रूप में दर्ज करती है जो बेहद चिंताजनक विषय है।

कार्तिकेय गोस्वामी ने लिखा है कि दिनकर गोस्वामी की कोरोना रोग उपचार के कारण 28 अगस्त 2020 को बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के कॉमेडी सेंटर में मृत्यु हो गई।

उस समय वहां पर कार्यरत ड्यूटी चिकित्सकों और स्टाफ ने गैर जिम्मेदाराना हरकत अपनाते हुए उनके मृत शरीर को सीधे ही मोर्चरी में भिजवा दिया।

परिवारजनों को इसकी किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। सुबह लगभग 7:00 7:30 बजे के आसपास जब वह उन्हें चाय देने गया, तब उनको कोविड सेंटर के गार्ड द्वारा सूचना दी गई कि दिनकर गोस्वामी की मृत्यु हो चुकी है तथा उनका मृत शरीर पीबीएनके मोर्चरी में रखवा दिया गया है।

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उन्होंने आगे लिखा है कि यहां पर आए दिन होने वाली अव्यवस्थाओं के कारण आमजन त्रस्त हैं, परंतु इस बार तो हद ही कर दी गई मृतक के साथ भी इस प्रकार का व्यवहार करना बहुत ही निंदनीय है।

किसी संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसके परिजनों को पता नहीं चले तो परिजनों का क्या हाल होता है? इस घटना को यदि मानवीय भावना से सोचे तो पता चलेगा कि एक परिवार की क्या दशा होती है।

कार्तिकेय ने लिखा है कि दिनकर गोस्वामी को 18 अगस्त को कोरोनावायरस बीकानेर के गंगाशहर रोड स्थित आशीर्वाद भवन में संचालित कोविड सेंटर में भर्ती करवाया गया, जहां पर उनकी तबीयत 20 अगस्त को ज्यादा खराब होने के कारण देर रात पीबीएम अस्पताल के कोविड सेंटर रेफर कर दिया गया।

उस समय उनकी तबीयत खराब होने के कारण भी पीबीएम अस्पताल के चिकित्सकों तथा स्टाफ के द्वारा लापरवाही की गई और उन्हें कई घंटों तक अस्पताल में बेड की व्यवस्था नसीब नहीं हुई।

लापरवाही की हद यह है कि मरीज को खुद इलेक्ट्रिकल कैटल से दूध, पानी गर्म करने पड़ते थे। यह सभी बातें मरीज द्वारा खुद मोबाइल पर परिजनों को बताई गई।

इसके पश्चात उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां पर उन्हें ऑक्सीजन होने के बावजूद अपने घर से भेजा गया भोजन लेने के लिए खुद ही गार्ड के पास जाना पड़ता था।

27 अगस्त को मरीज घर से भेजा गया भोजन और नाश्ता शाम 4:00 बजे तक नहीं पहुंचा। मरीज डायबिटीज के रोगी था, डायबिटीज के रोगी को समय पर यदि नाश्ता और भोजन में मिले तो उनकी तबीयत खराब होना लाजमी है, कमजोरी आना स्वभाविक है, जबकि मरीज को उसके बेड खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी वहां कार्यरत सपोर्टिंग स्टाफ की होती है।

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जब उन्हें 27 अगस्त को रात्रि में कोविड सेंटर के सुपर स्पेशलिटी के एमआईसीयू में शिफ्ट किया गया, तब भी परिजनों को सूचित नहीं किया गया।

उन्होंने लिखा है यह तो कहा कि परिजनों ने रात में डॉक्टर से उसकी हालत जानने के लिए बात की, तब उन्हें पता चला। तब भी 70% रिकवरी के चांसेस के पश्चात उनका रात में क्या उपचार किया गया।

उनकी मृत्यु कब हुई, किस कारण हुई, इसके बारे में कोई जानकारी परिजनों को नहीं थी। मृतक गोस्वामी की मृत्यु के पश्चात जैसे-तैसे व्यवस्थाएं कर परिजनों द्वारा मोर्चरी में संपर्क किया और वहां उन्हें अव्यवस्थाओं का मुंह देखना पड़ा।

मोर्चरी स्टाफ ने परिवार के किसी भी व्यक्ति को मृतक का चेहरा नहीं दिखाया था, ताकि पुष्टि हो सके। मृत्यु के उपरांत जब उनके मृतक शरीर को शमशान घाट ले जाया गया, तब भी शव यात्रा वाहन और 108 एंबुलेंस के कार्मिकों द्वारा लापरवाही बरतते हुए उतारने के लिए पैसों की मांग की गई।

इसके पश्चात भी परिजनों ने दुखद मृत्यु को देखते हुए और धैर्य अपनाते हुए यह पीड़ा भी सहन की, ताकि अंतिम संस्कार की रस्म में कोई बाधा न आए।

इसके अतिरिक्त जब पीबीएम के अधीक्षक कार्यालय में कोविड-19 से दिनकर गोस्वामी के वहां भर्ती रहने से लेकर मृत्यु तक के सभी कागजातों की एक रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया, जिसमें उनकी क्या जांच हुई और प्रत्यय क्या उपचार किया गया, उन्हें क्या दवाई दी गई, उनकी मृत्यु का कारण क्या रहा?

पीबीएनके कोविड सेंटर, जहां भर्ती रहे उसके सीसीटीवी कैमरे की फुटेज थे, लेकिन इन सभी कागजात की एक रिपोर्ट देने के लिए भी परिजनों को अनेक चक्कर कटवाए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज के लिए तो इतना कह दिया गया है कि कैमरे 22 अगस्त से खराब है।

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कार्तिकेय गोस्वामी ने प्रभारी मंत्री से आग्रह करते हुए लिखा है कि उनके प्रार्थना पत्र के माध्यम से समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए उचित दिशा निर्देश दिए जाएं, ताकि पीड़ित परिवार जनों को न्याय मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही का शिकार किसी को नहीं होना पड़े।