अशोक गहलोत को कल फिर से सीधी चुनौती देंगे सचिन पायलट!

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सोमवार को एक बार फिर से सीधी चुनौती देते हुए नजर आएंगे। सचिन पायलट अपने जन्म दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में समर्थकों के द्वारा अपनी ताकत दिखाने का प्रयास करेंगे।

सचिन पायलट के जन्म दिवस को लेकर प्रदेश भर के सभी 33 जिलों में और तमाम तहसील स्तर पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। सचिन पायलट के द्वारा समर्थकों से कहा गया है कि जयपुर में आकर उनको शुभकामनाएं और बधाई देने के बजाय अपने अपने स्तर पर ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया जाए।

सचिन पायलट के साथ पिछले दिनों जो अट्ठारह विधायक हरियाणा में चले गए थे और एक महीने बाद वापस लौटे थे, उन सभी विधायकों के द्वारा अपने-अपने जिलों और संभाग स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयारी की जा रही है।

सचिन पायलट के जन्मदिन का मौका और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पायलट के द्वारा अपना जनाधार दिखाने का यह अवसर 2 साल में पहली बार आया हुआ लग रहा है।

13 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक जंग चली, जिसका वैसे तो विधिवत तौर पर समापन हो चुका है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस शीत युद्ध के अभी और आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसा लग रहा था कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन अशोक गहलोत के द्वारा आलाकमान के साथ तिकड़मबाजी कर मुख्यमंत्री बनने में कामयाबी हासिल कर ली गई।

सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनने में कामयाब नहीं हुए और तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर मई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत के नेतृत्व के असफल होने पर उनको मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन देकर उपमुख्यमंत्री बना दिया गया।

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मई 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त राजस्थान में कांग्रेस एक बार फिर से 2014 की तरह पूरी तरह नाकाम रही। सभी 25 लोकसभा सीटों पर भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के गठबंधन को जीत हासिल हुई।

इसके बाद सचिन पायलट की तरफ से कांग्रेस आलाकमान के समक्ष पुरानी बात याद दिलाते हुए उन को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपील की गई। लेकिन तब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से राहुल गांधी इस्तीफा दे चुके थे और सोनिया गांधी फिर से अध्यक्ष बन चुकी थी, जिनकी नजर में अशोक गहलोत ज्यादा बेस्ट थे।

इसके चलते अशोक गहलोत सरकार की तमाम नाकामियों और राजनीतिक नियुक्तियां नहीं करने के साथ ही सचिन पायलट के खेमे के साथ सामंजस्य नहीं बिठाने के बावजूद अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया गया और सचिन पायलट को लगातार कमजोर करने का प्रयास किया गया।

दोनों नेताओं के बीच लगातार तनातनी बढ़ती चली गई और आखिरकार इस बार जब राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना था। तब ऐसा लग रहा था कि सचिन पायलट के ने की तरफ से कांग्रेस के उम्मीदवारों को मतदान नहीं करके भाजपा के पक्ष में कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार आराम से जीत गए।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस आलाकमान की तरफ से उनको चुनाव के बाद प्रदेश में सत्ता सौंपी जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक बार फिर से अशोक गहलोत और उनके साथी मंत्रियों के द्वारा लगातार दरकिनार किया गया। जिससे नाराज होकर सचिन पायलट अपने साथी विधायकों के साथ 13 जुलाई को हरियाणा चले गए।

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दूसरी तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और उनको समर्थन करने वाले तमाम विधायक लगातार एक महीने तक जयपुर-जैसलमेर की दो होटलों के अंदर कैद रहे।

लेकिन विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले सचिन पायलट के द्वारा कांग्रेस आलाकमान के साथ बातचीत करके तीन सदस्य समन्वय समिति का गठन कराने और प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडे की जगह अजय माकन को प्रदेश प्रभारी महासचिव बनाने में कामयाबी हासिल कर ली गई।

यह भी आश्वासन दिया गया कि 3 सदस्य समिति सचिन पायलट और उनकी तरह नाराज विधायकों की शिकायतों का निवारण करने के लिए सुनवाई करेगी और राज्य की अशोक गहलोत सरकार से उन्हें शिकायतों का निवारण करवाने का काम करेगी। अभी तक समन्वय समिति राजस्थान में आई भी नहीं है।

जिस तरह से कांग्रेस आलाकमान के द्वारा 3 सदस्य समिति में अहमद पटेल को अध्यक्ष बनाया गया है। केसी वेणुगोपाल और अजय माकन को सदस्य बनाया गया है, उससे शायद पायलट को ऐसा लग रहा है कि निकट भविष्य में भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा और उनके मान-सम्मान को लौटाने का काम भी नहीं किया जाएगा।

ऐसे में सचिन पायलट ने अपने जन्म दिवस के मौके को बुलाने के लिए प्रिया शुरू किया है। सचिन पायलट के साथ ही विधायक, जिनमें दो पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं और बाकी सभी विधायक मिलकर इस आयोजन को बड़े पैमाने पर आयोजित करने का प्रोग्राम तैयार कर चुके हैं।

सोमवार को पूरे प्रदेश भर के 33 जिलों और दर्जनों तहसीलों में सचिन पायलट के जन्म दिवस के मौके पर बड़े पैमाने पर ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें हजारों लोगों के शामिल होने और रक्तदान किए जाने की तैयारी है।

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कहा यह भी जा रहा है कि सचिन पायलट और उनके साथी विधायक व समर्थकों के द्वारा ब्लड डोनेशन का विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके जरिए न केवल वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जाएगा, बल्कि प्रदेश की सरकार और कांग्रेस आलाकमान को सचिन पायलट के जनाधार का एहसास भी कराया जाएगा।

सचिन पायलट और उनके साथी विधायक यह दिखाना चाहते हैं कि दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने अशोक गहलोत के बजाय सचिन पायलट को मैंडेट दिया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के साथ तिकड़मबाजी कर अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हो गए।

चर्चा यह भी है कि सचिन पायलट एक बार फिर से गहलोत सरकार से बगावत करने पर विचार कर रहे हैं। उससे पहले राज्य में अपना जनाधार टटोलने का काम भी करेंगे। साथ ही यदि मध्यावधि चुनाव की संभावना बनती है, तो कांग्रेस आलाकमान के समक्ष अपना दावा भी इसी बहाने पेश कर सकते हैं।

जिस स्तर की तैयारी चल रही है उसी स्तर के मुताबिक यदि भीड़ एकत्रित करने और ब्लड डोनेशन कैंपों के माध्यम से विश्व रिकॉर्ड बनाने में सचिन पायलट और उनके समर्थक कामयाब रहे, तो निश्चित रूप से आने वाले समय में राजस्थान में अशोक गहलोत को शासन करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।