वसुंधरा सरकार द्वारा अयोग्य बताकर बर्खास्त गहलोत के करीबी 34 में से 28 शिक्षक फिर से बहाल

वसुंधरा सरकार द्वारा अयोग्य बताकर बर्खास्त गहलोत के करीबी 34 में से 28 शिक्षक फिर से बहाल

जोधपुर।
पिछली वसुंधरा राजे सरकार द्वारा अयोग्य करार दे साल 2017 में बर्खास्त किये गये 34 में से 28 शिक्षकों को अशोक गहलोत सरकार के शासन ने बहाल कर दिया है। मजेदार बात यह है कि तत्कालीन भाजपा शासन में जयनारायण व्यास विवि जोधपुर की सिंडीकेट बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर 34 शिक्षकों को फर्जीवाड़े के आरोप अयोग्य करार दे बर्खास्त किया गया था।

इन सभी शिक्षकों को सिंडीकेट द्वारा फरवरी 2017 में अयोग्य करार देते हुये बर्खास्त किया गया था। इस मामले में लगभग ढाई साल से प्रकरण कोर्ट में चल रहा है। इन शिक्षकों की भर्ती साल 2012—13 की शिक्षक भर्ती में हुई थी।

शनिवार को विवि सिंडीकेट बैठक में टेबल आइटम पेशकर प्रशासन ने बर्खास्त 34 में से 28 को पुन: बहाल कर दिया है। इस बैठक में प्रकरण को शामिल करने के लिये पूरक एजेंडे के तौर पर शामिल किया गया था।

जानकारी में आया है कि विवि सिंडीकेट के द्वारा कुलपति की रिपोर्ट, एसीबी की आज की हालत और कानूनी राय लेने के बाद यह फैसला किया गया है। एसीबी की रिपोर्ट में 34 में से 26 को दोषमुक्त कर दिया है।

जिस तरह से तब एसीबी के द्वारा ताबतोड़ कार्रवाही गई और इन शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था, तब कहा गया था कि सभी शिक्षक अशोक गहलोत के करीबी लोग हैं और नियमों को दरकिनार कर अयोग्य लोगों को शिक्षक बनाया गया था।

इसके साथ ही एसीबी ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि शिक्षक भर्ती में बड़ा घपला हुआ था, जिसके आधार पर ही शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था। यह भी बताया गया था कि तब वसुंधरा राजे सरकार आने पर बदले की भावना से काम किया गया था।

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लेकिन इसके साथ ही अब सवाल यह उठ रहे हैं कि यदि वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा गलत कार्यवाही की गई थी, तो क्या शिक्षकों की नियुक्ति सही थी? अगर सही नहीं थी, तो फिर उनको नियुक्त क्यों किया गया? यदि सही तो हटाया क्यों गया? संभवत: इसका जवाब अब कोई नहीं दे पायेगा।

तब इस प्रकरण को लेकर विधानसभा के भीतर भी हंगामा हुआ था और वसुंधरा राजे सरकार द्वारा आरोप लगाया गया था कि अशोक गहलोत के करीबी लोगों के द्वारा विवि में घपला कर अयोग्य लोगों को शिक्षक बना दिया गया था।