राजस्थान में कांग्रेस के विधायकों के सामने आया अब तक का सबसे बड़ा संकट है, क्या है जानिए

जयपुर। राजस्थान की सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच जुलाई के महीने में जो लड़ाई शुरू हुई थी, वह भले ही तुम गई हो, लेकिन कांग्रेस के विधायकों के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

कांग्रेस के और निर्दलीय मिलाकर करीब 100 से ज्यादा विधायक अशोक गहलोत के साथ जुलाई और अगस्त के महीने में 1 माह तक दो होटलों में बड़ेबंदी के रूप में रहे। इस दौरान सोशल मीडिया पर जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली उसको भी अशोक गहलोत और उनके साथी विधायकों ने गंभीरता से नहीं लिया।

भले ही सचिन पायलट के द्वारा उनके साथ ही 19 विधायकों के साथ सरकार में बगावत की गई हो, लेकिन फिर भी जनता के कार्य सरकार में नहीं होने और अशोक गहलोत व उनके साथी विधायकों के द्वारा इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाने के कारण 19 विधायक राजस्थान की जनता की नजर में हीरो हो गए हैं।

सचिन पायलट के द्वारा पिछले दिनों जयपुर से टोंक तक 100 किलोमीटर का शक्ति प्रदर्शन किया गया और जनता की नब्ज को पकड़ने का प्रयास किया गया कि आखिर इस विवाद के बाद भी जनता उनके साथ है या फिर अशोक गहलोत के साथ है?

सचिन पायलट की यात्रा को मिले बड़े जबरदस्त रिस्पांस के बाद दूसरे दिन तत्कालीन खाद्य मंत्री रहे बर्खास्त होने के बाद रमेश मीणा भी जयपुर से सवाई माधोपुर की यात्रा पर निकले और उन्होंने भी सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ अपने समर्थकों की संख्या जानने का प्रयास किया।

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इन दोनों पूर्व मंत्रियों के अलावा सोशल मीडिया पर पूर्व पर्यटन एवं देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी अपने समर्थकों का मन टटोलने का प्रयास किया, जिसमें उनको बड़ी सफलता हाथ लगी।

इसके साथ ही बागी विधायकों में नागौर से आने वाले मुकेश भाकर ने भी स्वागत सत्कार के नाम पर अपने क्षेत्र के लोगों का मन जानने का प्रयास किया। उनके सामने भी सचिन पायलट, रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह की तरह ही जनता का प्रदर्शन रहा, जिससे वह काफी खुश नजर आए।

सचिन पायलट और उनके साथी सभी विधायकों ने अपने अपने क्षेत्र में जनता के बीच जाकर ये दिखाने का प्रयास किया कि उनके लिए उन्होंने सरकार में बगावत की है और अपनी आगे की राजनीतिक जमीन को तैयार करने की शुरुआत कर दी गई है।

दूसरी तरफ अशोक गहलोत के मैसेज भरतपुर से आने वाले जोगिंदर अवाना का जिस तरह से क्षेत्र में विरोध हुआ और एक बार उनकी गाड़ी की तरफ पत्थर भी फेंके गए उससे स्पष्ट है कि अशोक गहलोत के खेमे के विधायकों से जनता काफी नाराज है।

संभवत यही कारण है कि अशोक गहलोत के में के करीब 100 से ज्यादा विधायक अपने अपने क्षेत्र में नहीं जा पा रहे हैं और जनता से सीधा संवाद भी नहीं कर पा रहे हैं।

अशोक गहलोत और उनके साथी इन विधायकों के सामने सबसे बड़ा धर्म संकट यह है कि यदि मध्यावधि चुनाव होने की संभावना बनी या फिर 2023 में चुनाव के दौरान वह अपने क्षेत्र में वोट मांगने जाएंगे, तो जनता का भारी विरोध सामने खड़ा हो सकता है।

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यही कारण है कि एक तरफ जहां सचिन पायलट के साथ ही विधायक अपने अपने क्षेत्र में जनसंपर्क में जुटे हुए हैं, वहीं अशोक गहलोत के में के विधायक और मंत्री जयपुर में अपने सरकारी निवास तक सीमित होते हुए नजर आ रहे हैं।