वसुंधरा के बिना डॉ सतीश पूनिया ने भाजपा को दिया जीवनदान

-चार महीने के बिजली बिल माफी, बढ़ी हुई बिजली दरें वापस लेने सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर भाजपा ने प्रदेशभर में दिये ज्ञापन, जनविरोधी कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा ने प्रदेशभर में करीब 1600 स्थानों पर लाखों कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने दिये ज्ञापन
जयपुर।

दिसंबर 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 2013 के मुकाबले 163 सीट से केवल 72 सीट पर रह गई।

2013 में भाजपा ने वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और 2018 में भी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया था।

दोनों चुनाव में फर्क किया था कि 2013 में राज्य की जनता अशोक गहलोत सरकार क्षेत्र स्थिति और तब नेतृत्व भले ही वसुंधरा राजे कराओ लेकिन चुनाव की पूरी कमान तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में थी और जनता को वसुंधरा राजे से ज्यादा नरेंद्र मोदी का चेहरा दिखाई दे रहा था।

लेकिन दिसंबर 2018 के चुनाव में सत्ता से बाहर होने के साथ ही वसुंधरा राजे के मन मुताबिक पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाया जाना उनको बहुत अखर गया।

नतीजा यह हुआ कि तब से लेकर अब तक वसुंधरा राजे लगातार अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और राष्ट्रीय नेतृत्व का विरोध कर रही हैं।

पहले पार्टी अध्यक्ष अशोक परनामी के हटने के बाद लंबे समय तक राष्ट्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे के बीच प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर खींचतान चलती रही।

आखिरकार दोनों के बीच राज्यसभा सांसद और आरएसएस भाजपा के पुराने कार्यकर्ता मदन लाल सैनी को अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बन गई।

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लेकिन मदन लाल सैनी का नेतृत्व अधिक समय तक नहीं चला और उनका निधन होने के कारण पार्टी को एक बार फिर से नए अध्यक्ष की तलाश करनी शुरू करनी पड़ी।

इस बार भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा वसुंधरा राजे की तमाम पसंद को दरकिनार करते हुए संघ पृष्ठभूमि के संगठन में लंबा अनुभव रखने वाले आमेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ सतीश पूनिया को अध्यक्ष बना दिया गया।

हालांकि यह बात सही है कि डॉक्टर सतीश पूनिया को अध्यक्ष बनाए जाने के कारण वसुंधरा राजे और उनके खेमे के तमाम लोग काफी नाराज हुए और प्रयास करीब 1 साल बाद भी यही चल रहा है कि उनको किसी भी तरह से विफल अध्यक्ष घोषित कर दिया जाए।

इस बीच मार्च के महीने से देश और दुनिया में कोरोनावायरस की महामारी फैल गई और संगठन यह सड़क पर उतरकर सरकार का विरोध करने और किसी भी अन्य गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं रही।

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जिस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है, ठीक उसी तरह से भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने भी इसी प्लेटफार्म पर अपनी बात रखनी शुरू कर दी और सरकार की खिंचाई भी की।

एक तरफ जहां पर वसुंधरा राजे के खेमे के तमाम लोग संगठन को कमजोर करने में लगे रहे तो दूसरी तरफ सतीश पूनिया का कुनबा बढ़ता गया उनके समर्थन में लोग जुड़ते गए।

अब जहां धीरे-धीरे कोरोनावायरस का डर कम होता जा रहा है वैसे ही भाजपा का संगठन फिर से सड़क पर उतरने लगा है। पिछले 1 सप्ताह से संगठन के द्वारा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

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पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हमेशा की तरह संगठन में सक्रिय नहीं हैं और वह लगातार निष्क्रिय रहकर राष्ट्रीय नेतृत्व को अपने गुस्से से वाकिफ करवाने का प्रयास कर रही हैं।

लेकिन भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने अपनी नई टीम के साथ प्रदेश भर में जिस तरह से हल्ला बोल कार्यक्रम के द्वारा सरकार को घेरने का काम किया है और सोशल मीडिया पर जबरदस्त एक्टिवेट हैं, उससे साबित होता है कि वसुंधरा की तमाम चालाकियां नाकाफी साबित हो रही हैं।

देखना तो दिलचस्प होगा, जब सरकार की जनविरोधी नीतियों और बिजली के बिलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा किस तरह से आंदोलन किया जाता है और सरकार को सड़क से सदन तक गिरने का काम किया जाता है?

इस बीच भाजपा ने प्रदेशभर में सभी जिलों, बूथों एवं मण्डलों तक कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों, चार महीने की बिजली बिल माफी, बिजली बिल पर फ्यूल सरचार्ज और स्थायी शुल्क हटाने, किसानों को प्रतिमाह 833 रूपये अनुदान शुरू करने, किसान कर्जमाफी सहित विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर प्रदेश के सभी जीएसएस पर ज्ञापन दिये हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां के नेतृत्व में प्रदेशभर के करीब 1600 स्थानों पर करीब लाखों पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसद एवं विधायकों, जिला परिषद एवं पंचायत समिति के जनप्रतिनिधियों, बूथ एवं मण्डल अध्यक्षों ने जीएसएस पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन दिये।

प्रदेश की अकर्मण्य कांग्रेस सरकार के खिलाफ कोरोनाकाल के चार महीने के बिजली बिल माफी, बढ़ी हुई बिजली दरें वापस लेने, फ्यूल सरचार्ज, स्थायी शुल्क एवं वीसीआर के नाम पर किसानों एवं आमजन के साथ लूट बंद करने सहित बिजली विभाग से सम्बन्धित विभिन्न समस्याओं एवं किसान कर्जमाफी को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने आमेर के मानपुरा माचेड़ी जीएसएस पर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने उदयपुर के हिरणमगरी जीएसएस पर, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने चुरू में पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन दिये।

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भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के नेतृत्व में जहां राजस्थान के तमाम सांसद, विधायक और पार्टी के पदाधिकारियों समेत भाजपा के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश भर में सक्रिय रहे हैं तो दूसरी तरफ जयपुर में होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर से निष्क्रिय दिखाई दे रही हैं।

इसके साथ ही यहां पर यह भी बताना जरूरी है कि 2013 में सत्ता में आने के बाद जिस तरह से पूरा राज्य के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से संगठन को कमजोर करने का कार्य किया गया, उसी संगठन को डॉ सतीश पूनिया ने फिर से नया जीवन दान देने का कार्य जरूर किया है।