सतीश पूनियां और वी. सतीश ने वसुंधरा राजे को दी चेतावनी, अब नहीं करेंगे बर्दास्त!

जयपुर। राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे जो कि वर्तमान में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, उनके द्वारा लगातार राजस्थान में पार्टी के कार्यक्रमों में अनुपस्थिति दिखाकर खुद का गुस्सा जाहिर करने का तरीका अभी पार्टी के पदाधिकारियों को भी उनके खिलाफ बोलने के लिए मजबूर करने लगा है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में रविवार को सम्भाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों की बैठक आयोजित हुई, जिसे भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री वी. सतीश, प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां, प्रदेश महामंत्री (संगठन) चन्द्रशेखर ने सम्बोधित किया।

लेकिन पिछले 1 साल से जिस तरह पार्टी के कार्यक्रमों में अनुपस्थित रही हैं, ठीक वैसे ही वसुंधरा राजे रविवार को भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। बैठक में प्रदेश महामंत्री एवं विधायक मदन दिलावर, सुशील कटारा, प्रदेश उपाध्यक्ष माधोराम चौधरी, मुकेश दाधीच, डाॅ. अलका सिंह गुर्जर, हमेराज मीणा, सांसद सी.पी. जोशी, भागीरथ चौधरी, रामचरण बोहरा, कनकमल कटारा, पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी, वासुदेव देवनानी, सहित सम्भागों एवं जिलों के प्रभारी मौजूद थे।

ऐसा लग रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे वर्तमान अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, और संभवत यही सबसे बड़ा कारण है कि जयपुर में मौजूद रहने के बावजूद वसुंधरा राजे भाजपा कार्यालय के कार्यक्रमों से लगातार दूरी बनाए हुए हैं।

इससे पहले भी कार्यक्रमों में वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुईं। जयपुर में होने के बावजूद वसुंधरा राजे ने पार्टी के दो कार्यक्रमों का एक तरह से बहिष्कार किया है। वसुंधरा राजे की यह गतिविधि प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व को चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

बैठक को सम्बोधित करते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने कहा कि पार्टी एवं विचार सबसे बड़ा है, इसलिए हमें पार्टी एवं विचार के प्रति समर्पित होकर काम करना है।

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उन्होंने कहा कि सम्भागों एवं जिलों के प्रभारी पूरी मजबूती के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वह्न करते हुए कार्यकर्ताओं से बेहतर संवाद करते हुए मण्डल एवं बूथों तक पार्टी की मजबूती के लिए काम करें और केन्द्र की मोदी सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का गहनता से अध्ययन कर आमजन तक पहुँचायें, जिससे आमजन को इसका लाभ मिल सके और मोदी का आत्मनिर्भर भारत का सपना भी जल्द साकार हो सके।

उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर ‘‘भाजपा’’ को ‘‘अजेय भाजपा’’ पार्टी बनाने की दिशा में मजबूती से काम करना है। उन्होंने प्रभारियों से आहृान करते हुए कहा कि ट्विटर, फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफाॅम्र्स का बेहतर उपयोग कर केन्द्र की मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से खुद को अपडेट रखें और आमजन तक पहुँचाने का कार्य करें।

मजेदार बात यह है कि वसुंधरा राजे लगातार पार्टी और पार्टी के अध्यक्ष द्वारा दिये जाने वाले लक्ष्यों में खुद को शामिल ही नहीं करती हैं।

इस अवसर पर डाॅ. पूनियां ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए 10 हजार एफपीओ बनाने जा रही है और पिछले दिनों भाजपा विधायक दल की बैठक को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर ने कहा था कि जरूरत पड़ेगी तो इनके अतिरिक्त और 10 हजार एफपीओ किसानों के लिए बनाये जायेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का उद्गम आन्दोलन है। विद्यार्थी, युवा, किसान मोर्चा सहित विभिन्न मोर्चों को पार्टी की मजबूती के लिए विचार के प्रति समर्पित होकर काम करना है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मेवात हो, शेखावाटी हो, पश्चिमी राजस्थान हो, पूर्वी राजस्थान हो, हाडौती हो, मारवाड़ हो, मेवाड़ हो प्रदेश के सभी क्षेत्रों के जनहित के विषयों को विपक्ष के नाते हम सभी को गम्भीरता से लेना है, मुखरता से उठाते हुए राज्य सरकार एवं प्रशासन को अवगत कराकर समाधान निकालने के लिए प्रयास करते रहना है।

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उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए सभी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाती है, जिसका पूरी शिद्दत के साथ पालन किया जाता है, लेकिन दल के लिए कोई भी व्यक्ति अपरिहार्य नहीं है।

एक तरह से पार्टी अध्यक्ष ने वसुंधरा राजे की अनुपस्थिति पर उनको ही सन्देश देने का काम किया गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री वी. सतीश ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि सम्भाग एवं जिला प्रभारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। हम सभी का पार्टी एवं जनहित के विषयों पर समय-समय पर वर्चुअल, सेमी वर्चुअल, फिजिकल संवाद होते रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संवाद एवं विचार-विमर्श बहुत जरूरी है और कार्य पद्धति को जानना भी बहुत जरूरी है। प्रभारियों को पार्टी की रीति-नीति से कार्यकर्ताओं एवं आमजन को अवगत कराने का कार्य अनवरत करते रहना है। हम सबको मिलकर पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करना है।

वी. सतीश ने कहा कि पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के मध्य संवाद दोनों तरफ से होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सबसे पहले भूमिका, योजना, विस्तृत जानकारी, निगरानी एवं समीक्षा करना बहुत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अच्छा सुनने वाला बनना चाहिए। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में कहा कि मैंने इनके बारे में पढ़ा एवं सुना है, वे बहुत अच्छे लिसनर (सुनने वाले) थे और प्रधानमंत्री मोदी जी के व्यक्तित्व में भी यही खासियत है कि वो बहुत अच्छे लिसनर हैं।

इसलिए कार्यकर्ताओं से संवाद करने के दौरान ये हमारे व्यक्तित्व में होना बहुत जरूरी है। वी. सतीश ने कहा कि कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान हमें दिल (व्यक्ति) एवं दल (भाजपा) में से हमें दल को महत्व देना है, दल की रीति-नीति को महत्व देना है, जिसके लिए हमें मजबूती से काम करना है।

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उन्होंने कहा कि पार्टी में सबका महत्व है, कोई अपरिहार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों की संचरना में समय की कार्ययोजना का बहुत ध्यान रखना है, जिसको हमें व्यवस्थित तरीके से अपने व्यक्तित्व एवं कार्यक्रमों में लागू करना है।

पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की भावना बहुत अच्छी होनी चाहिए। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री (संगठन) चन्द्रशेखर ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि पार्टी की रीति-नीति को मण्डल एवं बूथ स्तर तक मजबूती से लागू करने के लिए हम सभी को कार्य करना है और इसके लिए सोशल मीडिया का भी बेहतर उपयोग करते रहना चाहिए।

साथ ही जिलों, मण्डल एवं बूथों के जनहित के विषयों का हमें ध्यान रखना है, जिनको समय-समय पर मीडिया एवं प्रशासन के समक्ष रखते हुए समाधान निकालने की कोशिश करते रहना चाहिए।

इस कार्यक्रम में जिस तरह से अध्यक्ष डॉ पूनियां और वी. सतीश के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से वसुंधरा राजे की अनुपस्थिति को नोटिस कर उनको एक तरह से चेतावनी दी गई है, उससे लग रहा है कि अब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राजे की इस गतिविधि पर गंभीर हो गया है।

इससे पहले जब राज्य की टीम राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना था, तब भी और उसके बाद जब अशोक गहलोत की सरकार पर राजनीतिक संकट आया, तब भी वसुंधरा राजे के द्वारा टि्वटर, फेसबुक या फिर मीडिया में आकर किसी भी तरह की बयानबाजी नहीं की गई और न ही राज्य सरकार की असफलताओं पर कभी कोई टिप्पणी की गई।