भाजपा से पूरी तरह कट चुकी हैं वसुंधरा राजे सिंधिया या उनको काटा जा रहा है?

जयपुर। राजस्थान की दो बार की मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ऐसा लग रहा है कि अपनी ही पार्टी से पूरी तरह कट चुकी हैं।

शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के द्वारा प्रदेश भर में हल्ला बोल कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें प्रदेश के सभी सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम को जहां सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक, टि्वटर इत्यादि पर ट्रेंड किया गया, तो दूसरी तरफ पार्टी के प्रभारियों और प्रमुख जिम्मेदार लोगों के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भी जनता में संदेश देने का कार्य किया गया।

ट्विटर पर ट्रेंड चलाया गया, लेकिन इस ट्रेंड में नेता वसुंधरा राजे ने हिस्सा लिया और न ही उनके द्वारा हमेशा की तरह कोई ट्विटर ट्वीट किया गया। ऐसा लग रहा है कि वसुंधरा राजे राजस्थान में एक बड़ी जंग की तैयारी कर रही हैं।

ऐसा लग रहा है कि वसुंधरा राजे के द्वारा राजस्थान के वर्तमान नेतृत्व को दरकिनार करते हुए सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व को चुनौती देने का मानस बनाया गया है।

जिस तरह से वसुंधरा राजे लगातार पिछले काफी समय से भाजपा के तमाम कार्यक्रमों में से खुद को दूर रखती आ रही हैं या फिर आंशिक रूप से ही सक्रिय रह रही हैं, उससे जाहिर है कि वसुंधरा राजे पार्टी के समस्त कार्यक्रमों में से खुद को दूर करने के लिए या फिर दूर दिखाने के लिए काम कर रही हैं।

हालांकि मोटे तौर पर देखा जाए तो वसुंधरा राजे के द्वारा ऐसा करना उनके गुस्से को दिखाता है और जिस तरह उनकी पसंद को दरकिनार करते हुए आमेर के विधायक डॉ सतीश पूनिया को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, उसके चलते वसुंधरा राजे काफी गुस्से में हैं और लगातार प्रयास कर रही हैं कि केंद्रीय नेतृत्व उनके गुस्से को नोटिस करें।

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इससे पहले 2 दिन पूर्व हुए कार्यक्रम में भी वसुंधरा राजे ने हिस्सा नहीं लिया था। तब उस कार्यक्रम को खुद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से संबोधित किया गया था।

लेकिन वसुंधरा राजे जयपुर में होने के बावजूद न तो पार्टी मुख्यालय पहुंची और न ही उन्होंने वर्चुअल जुड़ने का प्रयास किया। यह बात और है कि कुछ समय के लिए उन्होंने वर्चुअल मीटिंग में जुड़ कर खानापूर्ति करने का कार्य जरूर किया।

अब वसुंधरा राजे के द्वारा जिस तरह शुक्रवार को हुई हल्ला बोल कार्यक्रम की समस्त गतिविधियों से खुद को दूर रखा गया, उससे साबित होता है कि वसुंधरा राजे अब प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधी चुनौती दे रही हैं।

यह बात और है कि दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता से बाहर जाने के बाद वसुंधरा राजे के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से तमाम तरह के मिलने के प्रयास पर उनको सफलता नहीं मिली, इसको लेकर भी कहीं ना कहीं वसुंधरा राजे गुस्से में हैं और अपने गुस्से को यदा-कदा वह इस तरह से जाहिर करती रहती हैं।