भतीजा सिंधिया संघ की शरण में, बुआजी राजे भाजपा कार्यालय में

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—राजकुमारी दिन में मिलकर गईं, शाम होते हुए रानी भी पहुंची भाजपा मुख्यालय
जयपुर।

राजस्थान के सियासी घटनाक्रम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सक्रियता इन दिनों चर्चा में है। लेकिन मंगलवार को बुआजी और भतीजे का कॉम्बिनेशन ऐसा हुआ कि एक तरफ जहां भतीजा, यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागपुर में डॉ. हेडगेवार के निवास और संघ कार्यालय पर पहली बार पहुंचकर हाजिरी हाजिरी लगाई, वहीं बुआजी, यानी वसुंधरा राजे करीब—करीब उसी समय राजस्थान भाजपा मुख्यालय पहुंचीं।

इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में देर रात तक काफी चर्चा हुई। साथ ही एक और रोचक वाकये ने भाजपा में चर्चा पैदा कर दी। दोपहर में जहां राजसमंद सांसद और जयपुर राजघराने की राजकुमारी व हाल ही में प्रदेश महामंत्री बनाई गईं दीया कुमारी भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां से मिल रही थीं, वहीं शाम को करीब 5 बजे महारानी, यानी वसुंधरा राजे उन्हीं अध्यक्ष डॉ. पूनियां से मिलने पहुंचीं।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे बीते एक सप्ताह से सिविल लाइन स्थित अपने सरकारी निवास पर ही कई सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और अन्य नेताओं से मुलाकात कर पार्टी गतिविधियों पर फीडबैक ले चुकी हैं।

इसके बाद राजे अचानक मंगलवार को शाम 5 बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचीं और दो घंटे तक राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी. सतीश, भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर से चर्चा की।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वसुंधरा राजे मंगलवार को वी. सतीश, डॉ. सतीश पूनियां और चंद्रशेखर के समक्ष प्रदेश की ताजा कार्यकारिणी, व्हिप जारी होने के बाद भी 14 अगस्त को विधानसभा की कार्यवाही से अनुपस्थित रहे 4 विधायकों के खिलाफ संभावित कार्यवाही और पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी की भाजपा में वापसी को लेकर शुरू हुई चर्चा को लेकर अपना पक्ष रखने आई थीं।

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इसके साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि 28 और 31 अगस्त के अलावा अगले महीने की 2 तारीख को भी भाजपा द्वारा प्रदेशभर में धरना—प्रदर्शन के बाद ज्ञापन दिया जाना प्रस्तावित है।

इसे लेकर भी नेताओं की बीच चर्चा होने की बात सामने आई है, लेकिन राजे के जाने के बाद भी तीनों नेताओं के बीच भी लंबी वार्ता हुई है। कहा जा रहा है कि राजे को अब संगठन में अधिक तवज्जो नहीं दी जा रही है, जिससे काफी आहत हैं और खुद को काफी कमजोर महसूस कर रही हैं।

पूर्व सीएम राजे के द्वारा कोरोनाकाल के समय में केवल यह तीसरा अवसर है, जब वो भाजपा मुख्यालय पहुंची हैं। बीते दिनों पार्टी नेताओं के साथ चर्चा करने से शायद उनको वास्तविक हालात के बारे में जानकारी मिल गई होगी।

कहा जा रहा है कि अब वसुंधरा राजे को अपना करियर ग्राफ नीचे जाता हुआ नजर आ रहा है और इसके चलते वो अपनी सियासी गतिविधियों के साथ ही किसी न किसी रुप में आरएसएस से करीबी बनाने में जुटी हुई हैं।

मंगवार को भाजपा मुख्यालय में करीब दो घंटे रुकने के बाद वसुंधरा राजे चली गईं। मजेदार बात यह है कि इस दौरान वी. सतीश ही उन्हें छोड़ने के लिए बाहर आए। राजे के जाने के बाद वी. सतीश, चंद्रशेखर और डॉ. पूनियां के बीच भी लंबी वार्ता हुई है।